गंदगी के अंबार से लेकर टूटी बाउंड्री तक सवालों के घेरे में व्यवस्था, हादसे से पहले कब जागेगा जिम्मेदार तंत्र?
बरेली। रविवार यानी छुट्टी के दिन जब अधिकांश विद्यालयों के गेट बंद रहते हैं, उस समय शहर के केडीईएम इंटर कॉलेज का परिसर खुला मिला। बताया गया कि विद्यालय की एक आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारी को प्रधानाचार्य के कहने पर परिसर की चौकीदारी के लिए बुलाया गया था। छुट्टी के दिन कर्मचारी को विद्यालय बुलाए जाने का मामला अब सवालों के घेरे में है। आखिर ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी कि रविवार को विद्यालय परिसर में कर्मचारी की ड्यूटी लगानी पड़ी?
छुट्टी के दिन ड्यूटी क्यों? प्रधानाचार्य के जवाब से उठे कई सवाल
इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब आउटसोर्सिंग कर्मचारी को रविवार को काम पर बुलाया जाता है तो उसे इसके बदले सोमवार या मंगलवार को अवकाश दिया जाता है। प्रधानाचार्य के मुताबिक यह व्यवस्था विद्यालय की आवश्यकता के अनुसार की जाती है। हालांकि, सवाल यह है कि रविवार को विद्यालय में ऐसी कौन-सी विशेष आवश्यकता थी, जिसके चलते आउटसोर्सिंग कर्मचारी को बुलाना जरूरी हो गया?
कॉलेज परिसर की तस्वीरें खोल रही हैं बदहाली की पोल, हर तरफ गंदगी और झाड़ियों का कब्जा
विद्यालय परिसर की स्थिति देखकर साफ दिखाई देता है कि साफ-सफाई की ओर लंबे समय से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। परिसर में जगह-जगह गंदगी, कूड़ा-कचरा और घनी झाड़ियां दिखाई दे रही हैं। जिस स्थान पर विद्यार्थियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए, वहां झाड़ियों और गंदगी का जमावड़ा चिंता पैदा कर रहा है।
हैंडपंप तक पहुंचना भी मुश्किल, विधायक के लगवाए हैंडपंप की हालत पर भी सवाल
विद्यालय परिसर में लगा हैंडपंप भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। बताया गया है कि यह हैंडपंप बरेली शहर के विधायक अरुण कुमार की ओर से लगवाया गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति ऐसी है कि हैंडपंप तक पहुंचना भी मुश्किल दिखाई देता है। उसके आसपास घनी झाड़ियां और गंदगी जमा है। सवाल उठता है कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए लगाया गया हैंडपंप यदि झाड़ियों और गंदगी के बीच पहुंच से बाहर हो जाए तो आखिर उसका लाभ किसे मिलेगा?
झाड़ियों में छिपे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा, बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
घनी झाड़ियों और लंबे समय से जमा गंदगी के कारण परिसर में सांप, बिच्छू और अन्य कीड़े-मकोड़ों के पनपने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा गंदगी और जमा पानी जैसी परिस्थितियां मच्छरों के पनपने का कारण बन सकती हैं। इससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विद्यालय में बच्चों की आवाजाही को देखते हुए यह स्थिति किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को जन्म देती है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है विद्यालय प्रशासन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि विद्यालय परिसर की यह स्थिति आखिर कब तक बनी रहेगी? यदि झाड़ियों में कोई जहरीला जीव छिपा हो और किसी विद्यार्थी के साथ अप्रिय घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या विद्यालय प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे? विद्यार्थियों की सुरक्षा किसी भी विद्यालय की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
टूटी बाउंड्री वॉल ने बढ़ाई चिंता, परिसर की सुरक्षा भी सवालों में
विद्यालय की बाउंड्री वॉल का कुछ हिस्सा टूटा हुआ बताया गया है। प्रधानाचार्य ने बातचीत के दौरान कहा कि बाउंड्री वॉल टूटी होने के लिए विद्यालय जिम्मेदार नहीं है। लेकिन टूटी हुई बाउंड्री के कारण विद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े होते हैं। यदि बाहरी व्यक्ति अथवा आवारा पशु आसानी से परिसर में प्रवेश कर सकते हैं तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था क्या है?
पहले पंखे चोरी होने की घटना का भी प्रधानाचार्य ने किया जिक्र
प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि विद्यालय परिसर से पहले पंखे चोरी हो चुके हैं। ऐसे में टूटी बाउंड्री और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं। यदि विद्यालय में चोरी की घटना पहले हो चुकी है तो परिसर की सुरक्षा मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए, यह भी जांच का विषय है।
प्रधानाचार्य बोले-जल्द होगी साफ-सफाई, लेकिन सवाल है कब तक?
विद्यालय की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर प्रधानाचार्य ने कहा कि कॉलेज परिसर की साफ-सफाई जल्द करा दी जाएगी। यह आश्वासन निश्चित रूप से राहत देने वाला है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सफाई व्यवस्था को पहले से दुरुस्त क्यों नहीं रखा गया? विद्यालय में रोजाना विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही होती है, ऐसे में सफाई के लिए किसी घटना का इंतजार क्यों?
जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क का प्रयास, फोन नहीं उठा
मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक बरेली का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है।
बड़ा सवाल-विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी किसकी?
केडीईएम इंटर कॉलेज की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। रविवार को आउटसोर्सिंग कर्मचारी को बुलाने की जरूरत हो या फिर परिसर में फैली गंदगी, घनी झाड़ियां, टूटी बाउंड्री और हैंडपंप तक पहुंचने में हो रही परेशानी—हर मुद्दा विद्यालय की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है। यदि विद्यालय परिसर में कोई अप्रिय घटना होती है तो जिम्मेदारी तय करने से पहले यह जरूरी है कि संभावित खतरे को ही खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि विद्यालय प्रशासन अपने आश्वासन के मुताबिक कब तक परिसर की सफाई कराता है और टूटी बाउंड्री समेत सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान कब तक होता है।