बरेली। मकान या व्यावसायिक भवन का नक्शा पास कराने में कोई तकनीकी पेच फंस गया है या ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ रहा तो बीडीए की नई पहल राहत दे सकती है। फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ाने के बजाय अब समस्या सामने रखकर उसका समाधान तलाशने की शुरुआत हुई है। गुरुवार को पहले मानचित्र समाधान दिवस और बीडीए विकास संवाद में करीब 30 आर्किटेक्ट और एलटीपी अफसरों के सामने बैठे। दो घंटे के भीतर करीब 10 भवन मानचित्रों का मौके पर निस्तारण और स्वीकृति कर दी गई।
बीडीए सभागार में सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक चले संवाद में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति पोर्टल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। आर्किटेक्ट और एलटीपी ने नक्शे के आवेदन से लेकर स्वीकृति तक सामने आने वाली तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियां अधिकारियों के सामने रखीं। एक-एक मामले पर चर्चा की गई। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव था, उनका वहीं निस्तारण किया गया और जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। करीब 10 भवन मानचित्रों पर फैसला होने के साथ संबंधित प्रकरणों की आवश्यक रिपोर्ट भी मौके पर जारी कर दी गईं।
जो फाइल मौके पर नहीं निपटी, उसे प्राथमिकता पर निपटाने के निर्देश
कुछ मामले ऐसे भी रहे जिनका समाधान तत्काल संभव नहीं था। इन प्रकरणों को संबंधित स्तर पर भेजकर प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि छोटी तकनीकी कमी या प्रक्रियागत उलझन के कारण भवन मानचित्र की फाइल लंबे समय तक अटकी न रहे। बीडीए इस व्यवस्था को सिर्फ एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसे नियमित संवाद का मंच बनाने की तैयारी है, जहां आवेदक और तकनीकी विशेषज्ञ मानचित्र स्वीकृति में आने वाली परेशानी सीधे अधिकारियों के सामने रख सकें।
आर्किटेक्ट के बाद बिल्डर-अस्पताल और उद्योग की भी सुनेगा BDA
बीडीए विकास संवाद का दायरा आगे और बढ़ाया जाएगा। आर्किटेक्ट और इंजीनियर ही नहीं, बिल्डर-डेवलपर, उद्योग, अस्पताल, होटल और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इन क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधि विकास और भवन निर्माण के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याएं बीडीए के सामने रख सकेंगे। इनसे मिलने वाले सुझावों के आधार पर मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था की उन खामियों को तलाशा जाएगा, जिनकी वजह से आवेदन अटकते हैं। जरूरत के मुताबिक प्रक्रिया में सुधार कर मानचित्रों के निस्तारण का समय घटाने की कोशिश होगी।
सिर्फ नक्शे की बात नहीं, शहर के भविष्य पर भी होगा मंथन
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे के मुताबिक विकास संवाद को आगे शहर की बड़ी जरूरतों से भी जोड़ा जाएगा। इसमें निवेश, रोजगार, नागरिक सुविधाओं और सुनियोजित विकास को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे। बीडीए की कोशिश है कि योजनाएं बनाने के साथ जमीन पर काम करने वाले लोगों की समस्याएं भी सीधे अधिकारियों तक पहुंचें। इससे नियमों और वास्तविक परिस्थितियों के बीच आने वाली परेशानियों का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकेगा।
पहले ही दिन 10 नक्शों पर फैसला, अब अगली बैठकों पर नजर
पहले आयोजन में करीब 30 आर्किटेक्ट और एलटीपी की मौजूदगी और 10 भवन मानचित्रों के मौके पर निस्तारण के बाद बीडीए इस मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। अगर संवाद नियमित रहा और उठाई गई तकनीकी समस्याओं पर स्थायी समाधान निकले तो नक्शा पास कराने के लिए लंबे इंतजार और बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है।