बरेली। इज्जतनगर की रहने वाली एक महिला ने अपने पति, ससुर और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कोर्ट ने उन्हें हर रविवार आठ वर्षीय युवराज सिंह से मिलने का अधिकार दिया है, लेकिन उन्हें बेटे से न खुलकर मिलने दिया जा रहा है और न ही सामान्य बातचीत करने दी जा रही है। उन्होंने डीआईजी अजय कुमार साहनी से शिकायत कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
विष्णुधाम कॉलोनी निवासी सुमन सिंह ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 जुलाई 2026 को हैबियस कॉर्पस रिट में युवराज की कस्टडी उसके जैविक माता-पिता हरवेन्द्र कुमार सिंह और नेहा सिंह को दी थी। साथ ही सुमन सिंह को हर रविवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बच्चे से मिलने का अधिकार दिया था। 6 जुलाई 2026 को दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को आदेश दिया था कि मुलाकात बिना किसी रुकावट के कराई जाए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा भी दी जाए।
बेटे से अकेले मिलने तक नहीं दिया जाता
सुमन सिंह का आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी पति हरवेन्द्र कुमार सिंह, ससुर शीशपाल सिंह, नेहा सिंह, रोहित सिंह और अन्य लोग हर मुलाकात में मौजूद रहते हैं। वह बेटे से अकेले बात नहीं कर पातीं। बेटे को गले लगाने और सामान्य बातचीत करने तक में रोक-टोक की जाती है। उनका कहना है कि परिवार के लोग बच्चे को अपने बीच बैठाकर रखते हैं, जिससे वह खुलकर बात नहीं कर पाता। वह 19 जुलाई की मुलाकात में युवराज डरा-सहमा दिखाई दिया। उसने उनकी तरफ ठीक से देखा भी नहीं। उनका आरोप है कि बच्चे पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बेटे ने इशारों में बताया कि उनके जाने के बाद उसके साथ मारपीट होती है।
डीआईजी से एफआईआर की मांग
सुमन सिंह ने डीआईजी को शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने की मांग की है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सुमन सिंह ने युवराज की परवरिश उसके 15 दिन का होने से लेकर आठ साल से अधिक समय तक की है और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता है। कोर्ट ने बातचीत के दौरान बच्चे की इच्छा का भी उल्लेख किया था। हालांकि, कस्टडी जैविक माता-पिता को देते हुए सुमन सिंह को हर रविवार मिलने का अधिकार दिया गया था।