bareillyखुलासा करते एसपी उत्तरी व गिरफ्त में आरोपी।

बरेली। भोजीपुरा पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों के नाम पर बैंक से 15 से 20 लाख रुपये तक का लोन कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनका एक साथी फरार है। आरोपियों के पास से 3.50 लाख रुपये नकद, 75 एटीएम कार्ड, 28 चेकबुक, सात पासबुक, आधार-पैन कार्ड, फर्जी पे-स्लिप और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया भोजीपुरा पुलिस को भनक लगी थी कि मॉडर्न विलेज के एक मकान में कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन कराने का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। रविवार रात गैंग के सदस्य ठगी से आई रकम का बंटवारा करने के लिए एकत्र हुए थे। पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने रात करीब 1:27 बजे मकान पर धावा बोल दिया। मौके से राम नयन गुप्ता उर्फ कृष्णा गुप्ता उर्फ कृष्ण कन्हैया, राकेश गुप्ता, अनिल गुप्ता और ऋषभ कुमार सक्सेना पकड़े गए।

टेबल पर 3.50 लाख, आसपास बिखरा था लोन का पूरा खेल

पुलिस ने तलाशी शुरू की तो मामला सिर्फ कुछ फर्जी कागजों तक सीमित नहीं निकला। ठिकाने से 3.50 लाख रुपये नकद के साथ 28 चेकबुक, सात बैंक पासबुक और 75 एटीएम कार्ड मिले। इसके अलावा तीन फर्जी परिचय पत्र, आठ आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, फर्जी फॉर्म-16, पे-स्लिप, 12 मोबाइल और 11 सिम कार्ड बरामद हुए। केनरा बैंक मुरादाबाद की मुहर भी मिलने का दावा किया गया है। पुलिस पूछताछ में सामने आई गैंग की कार्यशैली ने अधिकारियों को भी चौंका दिया। आरोप है कि गैंग सबसे पहले ऐसे लोगों से संपर्क करता, जिनकी बैंकिंग और सिबिल प्रोफाइल लोन के लिए मुफीद होती। उनके आधार कार्ड से नया सिम हासिल किया जाता और फिर आधार में पता बदलवाने का खेल शुरू होता। बदले हुए पते के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे।

दो-तीन महीने सैलरी भेजकर कागजों में बना देते नौकरीपेशा

खाता खुलते ही अगला चरण शुरू होता। पुलिस के मुताबिक गैंग संबंधित व्यक्ति के खाते में दो से तीन महीने तक बाकायदा वेतन के नाम पर रुपये ट्रांसफर करता था। इससे बैंक रिकॉर्ड में नियमित आय दिखने लगती। इसके बाद फर्जी परिचय पत्र, पे-स्लिप, फॉर्म-16, पता और एग्रीमेंट समेत लोन के लिए जरूरी कागजात तैयार किए जाते। कागजों पर पूरी प्रोफाइल ऐसी बनाई जाती, जैसे संबंधित व्यक्ति नियमित नौकरी कर रहा हो। फर्जी नौकरी और सैलरी रिकॉर्ड तैयार होने के बाद असली खेल शुरू होता था। पुलिस के अनुसार जिन लोगों की सिबिल अच्छी होती, उनके नाम से बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक समेत दूसरे बैंकों में 15 से 20 लाख रुपये तक के लोन की फाइल लगाई जाती थी। कागजों में नौकरी, खाते में सैलरी और बेहतर सिबिल देखकर लोन मंजूर होने का रास्ता तैयार हो जाता था।

लोन मंजूर होते ही नया झांसा, प्रधानमंत्री योजना से आया पैसा

लोन स्वीकृत होने के बाद भी कथित ठगी का खेल खत्म नहीं होता था। जिन लोगों के नाम पर लोन लिया जाता, उन्हें बताया जाता कि पैसा प्रधानमंत्री योजना के तहत मिला है। इसके बाद उन्हें रकम का मामूली हिस्सा देकर बाकी लाखों रुपये चेक और अन्य बैंकिंग माध्यमों से निकाल लिए जाते। यही रकम गैंग के सदस्य आपस में बांटते थे। पुलिस पूछताछ में लखीमपुर खीरी के संजीव कुमार का मामला भी सामने आया है। आरोपियों के कथित बयान के मुताबिक संजीव के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा से 20 लाख रुपये का लोन कराया गया। लेकिन संजीव को सिर्फ 71 हजार रुपये दिए गए। बाकी रकम चेक के जरिए निकालकर गैंग ने आपस में बांट ली। पुलिस का दावा है कि बरामद 3.50 लाख रुपये इसी रकम का बचा हुआ हिस्सा है।

75 ATM कार्ड और 28 चेकबुक ने बढ़ाया जांच का दायरा

एक ही ठिकाने से 75 एटीएम कार्ड और 28 चेकबुक मिलने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि गैंग ने अब तक कितने लोगों के दस्तावेज इस्तेमाल किए, कितने बैंक खाते खुलवाए और कितने करोड़ रुपये के लोन कराए। बरामद मोबाइल और सिम कार्ड से भी नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। पुलिस पूछताछ के मुताबिक आरोपियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा की इज्जतनगर शाखा से भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों के नाम लोन पास कराकर रकम हासिल करने की बात कही है। पुलिस अब बैंक खातों, चेक से हुए भुगतान और रकम के ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में और नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस के मुताबिक गैंग में राम नयन, राकेश, अनिल और ऋषभ के अलावा आमिर खान उर्फ यामिर खान भी शामिल है। वह फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस का मानना है कि आमिर की गिरफ्तारी और मोबाइल-बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े और लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

पहले भी फर्जीवाड़े में आ चुके हैं चारों के नाम

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ इज्जतनगर थाने में भी धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा मुकदमा दर्ज है। ऋषभ कुमार सक्सेना के खिलाफ बदायूं कोतवाली में भी एक मुकदमा दर्ज बताया गया है। भोजीपुरा पुलिस ने चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पूरे ऑपरेशन में भोजीपुरा प्रभारी निरीक्षक कुंवर बहादुर सिंह की टीम के साथ एसओजी प्रभारी सुनील शर्मा और सर्विलांस टीम भी शामिल रही। पुलिस अब बरामद बैंक दस्तावेज, मोबाइल, सिम, आधार-पैन कार्ड और खातों के लेनदेन को खंगाल रही है। जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि 75 एटीएम कार्ड और 28 चेकबुक के पीछे आखिर कितने लोगों के नाम और कितने लाख या करोड़ रुपये के लोन का खेल छिपा है।

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