नई दिल्ली। देश के बैंकिंग सिस्टम और सरकारी फंड की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण के लिए रिज मैनेजमेंट बोर्ड के खाते में जमा करोड़ों रुपये में कथित गड़बड़ी ने सनसनी फैला दी है। मामला इतना गंभीर हो गया कि Delhi High Court को खुद दखल देना पड़ा। अदालत ने Bank of Baroda को 217.60 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अदालत में जमा कराने का निर्देश दिया है। आरोप है कि रिज क्षेत्र के संरक्षण के लिए रखे गए करीब 70.25 करोड़ रुपये रहस्यमय तरीके से गायब हो गए।
यह पूरा मामला दिल्ली के रिज क्षेत्र यानी राजधानी के “ग्रीन लंग्स” से जुड़ा हुआ है। यह वही इलाका है जो दिल्ली की पर्यावरणीय संतुलन व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस पैसे का इस्तेमाल हरियाली और पर्यावरण बचाने में होना चाहिए था, वह या तो बेकार पड़ा रहा या फिर कथित रूप से गायब कर दिया गया।
SBI से बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रांसफर हुए थे करोड़ों रुपये
जानकारी के मुताबिक वन एवं वन्यजीव विभाग ने ज्यादा ब्याज दर का लाभ लेने के लिए करीब 223 करोड़ रुपये State Bank of India से बैंक ऑफ बड़ौदा की देशबंधु रोड शाखा में ट्रांसफर किए थे। यह रकम 113 फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों यानी एफडीआर में रखी गई थी। विभाग का दावा है कि बैंक अधिकारियों ने कथित रूप से “बदनीयती” से काम करते हुए इस रकम में गड़बड़ी की और करीब 70.25 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकाल लिए गए। इस खुलासे के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया। मामला सीधे सरकारी फंड और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा होने के कारण अदालत ने इसे बेहद गंभीर माना।
रिज क्षेत्र की सुरक्षा के पैसे पर डाका!
दिल्ली रिज क्षेत्र को राजधानी का पर्यावरणीय सुरक्षा कवच माना जाता है। यहां की हरियाली दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसी क्षेत्र के संरक्षण और विकास के लिए यह रकम रिज मैनेजमेंट बोर्ड के पास जमा थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शहर का पर्यावरण लगातार बिगड़ रहा है, लेकिन जिस पैसे से रिज क्षेत्र को मजबूत किया जाना था, वही रकम विवादों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कोर्ट ने कहा कि यह पैसा तत्काल पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में लगाया जाना चाहिए था।
हाई कोर्ट ने बैंक को लगाई फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जसमीत सिंह ने बैंक की दलीलों पर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने बैंक की उन कोशिशों को खारिज कर दिया जिनमें दोष वन विभाग के अधिकारियों पर डालने की कोशिश की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि करोड़ों रुपये की यह रकम जनता और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ी थी। ऐसे में इसकी जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। अदालत ने बैंक को पूरी राशि सुरक्षित रखने और अदालत के समक्ष जमा करने का आदेश दिया।
CBI कर रही बड़े घोटाले की जांच
इस पूरे मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation यानी CBI कर रही है। एजेंसी इसे बड़े स्तर पर हुए गबन और वित्तीय अनियमितता के रूप में देख रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी रकम कैसे निकाली गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। सूत्रों के मुताबिक कई बैंक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। CBI बैंक रिकॉर्ड, एफडीआर दस्तावेज और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है।
217 करोड़ जमा करने का आश्वासन
30 अप्रैल को हुई सुनवाई में बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से पेश अधिवक्ता कुश शर्मा ने अदालत को बताया कि बैंक अगली सुनवाई से पहले 217.60 करोड़ रुपये रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करा देगा। अदालत ने पहले विवाद रहित 152.75 करोड़ रुपये सुरक्षित रखने का आदेश दिया था, जबकि गायब हुए 70.24 करोड़ रुपये को लेकर जांच अभी जारी है।यह मामला अब केवल बैंकिंग गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी फंड की सुरक्षा और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।
DUSIB की याचिका से बढ़ी मुश्किलें
मामले में नया मोड़ तब आया जब Delhi Urban Shelter Improvement Board यानी DUSIB ने भी अपने फंड को लेकर अलग याचिका दायर कर दी। अदालत ने कहा कि अलग-अलग मामलों में विरोधाभासी फैसलों से बचने के लिए दोनों मामलों की सुनवाई एक ही बेंच करेगी।जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता ने DUSIB से जुड़े मामले को भी उसी बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया है जो वन विभाग से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है।
12 मई को होगी अहम सुनवाई
अब इस हाई प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी। अदालत यह देखेगी कि बैंक ने पूरी रकम जमा कराई या नहीं और CBI जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है। इस केस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि मामला सरकारी धन, बैंकिंग सिस्टम और पर्यावरण सुरक्षा तीनों से जुड़ा है। अगर जांच में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार साबित होता है तो कई अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल अदालत के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि करोड़ों रुपये के इस खेल में जिम्मेदार लोगों को आसानी से राहत मिलने वाली नहीं है।