सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में शनिवार शाम आई तेज आंधी-तूफान ने ऐसा कहर बरपाया कि तीन परिवारों की दुनिया उजड़ गई। बभनी थाना क्षेत्र के चौना गांव में आम बीन रहीं दो मासूम बच्चियां आकाशीय बिजली की चपेट में आ गईं और मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं पास में खड़ा एक बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। दूसरी ओर चक चपकी गांव में तेज आंधी के झोंके ने एक 12 वर्षीय बच्चे को बाउली में धकेल दिया, जहां डूबने से उसकी मौत हो गई। कुछ ही घंटों में तीन मासूम जिंदगियां खत्म हो गईं और पूरे इलाके में मातम पसर गया।
पेड़ के नीचे खेल रही थीं, अचानक गिरी मौत बनकर बिजली
घटना बभनी थाना क्षेत्र के चौना गांव की है, जहां शनिवार शाम मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। गांव की 9 वर्षीय अर्चना (पुत्री विष्णु दयाल) और 8 वर्षीय आस्था (पुत्री राजेश कुमार) घर के पास आम के पेड़ के नीचे गिरे आम बीन रही थीं। तभी तेज गर्जना के साथ बिजली सीधे उसी पेड़ पर गिरी। पलभर में दोनों मासूम उसकी चपेट में आ गईं। आसपास मौजूद लोगों ने जब तक दौड़कर उन्हें संभालने की कोशिश की, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों बच्चियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। मासूमों की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
तीसरा बच्चा भी चपेट में, टूटा हाथ—जिंदगी और मौत के बीच जंग
उसी दौरान पास में खड़ा 12 वर्षीय हर्ष (पुत्र देवनारायण) भी बिजली गिरने से प्रभावित हुआ। तेज झटके से वह जमीन पर गिर पड़ा और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। ग्रामीणों ने उसे तुरंत उठाकर प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, हर्ष की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह सदमे में है। गांव वाले बताते हैं कि तीनों बच्चे साथ खेल रहे थे, लेकिन किसे पता था कि यह खेल मौत में बदल जाएगा।
दूसरे गांव में भी कहर: आंधी के झोंके ने छीनी इकलौती संतान
इसी दौरान बभनी क्षेत्र के ही चक चपकी गांव में एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां 12 वर्षीय संतोष कुमार (पुत्र राम सुंदर) अपने घर के पास स्थित बाउली के किनारे खड़ा था। तेज आंधी के झोंकों ने उसका संतुलन बिगाड़ दिया और वह सीधे पानी से भरी बाउली में जा गिरा। आसपास मौजूद लोग जब तक उसे बचाने के लिए दौड़े, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। संतोष की डूबने से मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात यह है कि संतोष अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। मां की चीखें और पिता की खामोशी पूरे गांव को रुला रही है।
कुछ ही घंटों में तीन मौतें, पूरे इलाके में मातम
शनिवार शाम का यह तूफान कुछ ही घंटों में तीन परिवारों के लिए काल बन गया। एक ओर जहां चौना गांव में दो मासूम बच्चियों की मौत ने गांव को सन्न कर दिया, वहीं चक चपकी गांव में एक इकलौते बेटे की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। गांव में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोग एक-दूसरे के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं, लेकिन इस दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
पुलिस पहुंची मौके पर, शुरू की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही बभनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों मामलों में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा के चलते हुआ हादसा है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की जरूरत
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक घटनाएं कितनी घातक हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश या तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि बिजली अक्सर ऊंची चीजों को निशाना बनाती है। ग्रामीण इलाकों में ऐसे हादसे अक्सर जागरूकता की कमी के कारण होते हैं। अगर समय रहते सावधानी बरती जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
टूटीं उम्मीदें, उजड़े सपने
तीनों मासूम बच्चों की मौत ने उनके परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। अर्चना और आस्था जहां अपने माता-पिता की आंखों का तारा थीं, वहीं संतोष अपने परिवार की इकलौती उम्मीद था। एक ही शाम में तीन घरों के चिराग बुझ गए। गांव में हर कोई यही कह रहा है—“काश, ये तूफान न आया होता…”