नई दिल्ली: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारतीय सेना ने थाईलैंड के पड़ोसी और हाल ही में उसके साथ सैन्य टकराव झेल चुके देश कंबोडिया के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास ‘सिनबैक्स-2’ (CINBAX-II) शुरू किया है। यह अभ्यास केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि आतंकवाद, साइबर और हाइब्रिड युद्ध जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने की तैयारी का अहम मंच बन गया है।
थाईलैंड-कंबोडिया तनाव के बीच भारत की एंट्री
दक्षिण-पूर्व एशिया में पिछले साल थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा को लेकर हालात काफी तनावपूर्ण रहे। जुलाई और दिसंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें गोलीबारी के साथ हवाई हमले तक किए गए। इस टकराव ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया। ऐसे माहौल में भारत का कंबोडिया के साथ सैन्य अभ्यास करना यह संकेत देता है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और अपने रणनीतिक हितों को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है।
3 मई को रवाना हुआ भारतीय दस्ता, 17 मई तक चलेगा अभ्यास
भारतीय सेना का दल 3 मई 2026 को कंबोडिया के लिए रवाना हुआ। यह संयुक्त अभ्यास 4 मई से 17 मई 2026 तक कंबोडिया के काम्पोंग स्पू प्रांत स्थित कैंप बेसिल में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 20-20 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। यह कंपनी-लेवल का जॉइंट ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसमें सैनिकों को सब-कन्वेंशनल ऑपरेशन यानी कम तीव्रता वाले युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों की ट्रेनिंग दी जा रही है।
क्या है ‘सिनबैक्स-2’ और क्यों है खास?
‘सिनबैक्स’ यानी Cambodia-India Military Exercise का यह दूसरा संस्करण है। इसका पहला चरण दिसंबर 2024 में आयोजित किया गया था। इस बार का संस्करण और ज्यादा एडवांस और रणनीतिक है।
इस अभ्यास की खासियतें:
- संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के तहत आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की प्रैक्टिस
- साइबर और हाइब्रिड वॉरफेयर से निपटने की रणनीति
- टेबल टॉप एक्सरसाइज के जरिए रणनीतिक निर्णय लेने की ट्रेनिंग
- नक्शों और कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए युद्ध की परिस्थितियों का अभ्यास
- मल्टी-नेशनल ऑपरेशन में तालमेल बढ़ाने पर फोकस
यह अभ्यास केवल फिजिकल ट्रेनिंग नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की जटिलताओं को समझने और उनसे निपटने की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।
हाइब्रिड वॉरफेयर पर खास जोर
आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। साइबर अटैक, फेक न्यूज, ड्रोन हमले और आतंकी गतिविधियां मिलकर ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ का नया चेहरा बन चुकी हैं। सिनबैक्स-2 में इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सैनिकों को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे एक साथ कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जाए और दुश्मन की रणनीतियों को समय रहते नाकाम किया जाए।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती
भारत की ‘Act East Policy’ के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रक्षा और कूटनीतिक संबंध मजबूत करना एक बड़ा लक्ष्य है। कंबोडिया के साथ यह अभ्यास उसी रणनीति का हिस्सा है। भारत पहले ही थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा चुका है। अब कंबोडिया के साथ बढ़ता सहयोग इस क्षेत्र में भारत की पकड़ को और मजबूत करेगा।
संतुलन की कूटनीति: थाईलैंड से भी मजबूत रिश्ते
दिलचस्प बात यह है कि भारत के थाईलैंड के साथ भी बेहद अच्छे रिश्ते हैं। सितंबर 2025 में भारत और थाईलैंड की सेनाओं ने भी संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। इससे साफ है कि भारत किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए तैयारी
सिनबैक्स-2 का एक बड़ा उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए सैनिकों को तैयार करना भी है। इस अभ्यास में सैनिकों को मल्टी-नेशनल फोर्स के साथ काम करने, स्थानीय परिस्थितियों में ऑपरेशन चलाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
रणनीतिक संदेश: भारत तैयार है हर चुनौती के लिए
इस अभ्यास के जरिए भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। चाहे आतंकवाद हो, साइबर खतरा हो या पारंपरिक युद्ध—भारतीय सेना हर मोर्चे पर अपनी क्षमता बढ़ा रही है।