मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तेल संकट का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में एक झटके में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये और हाई-स्पीड डीजल 335.86 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इस फैसले से पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तान की जनता पर महंगाई का और बड़ा बोझ पड़ गया है।
पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों का बड़ा झटका
पड़ोसी देश पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसने आम जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में एक झटके में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है। यह वृद्धि देश के इतिहास में सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी मानी जा रही है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
नई कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड
नई कीमतों के अनुसार पाकिस्तान में हाई-स्पीड डीजल की कीमत 280.86 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं पेट्रोल की कीमत 266.17 रुपये से बढ़कर 321.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी करीब 17 से 20 प्रतिशत तक की मानी जा रही है, जो एक ही बार में हुई सबसे बड़ी वृद्धि है।
आर्थिक संकट में फंसी जनता पर नया बोझ
पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के कारण आम लोगों की हालत पहले ही खराब है। ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार यह संकट घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का परिणाम है। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिला है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करती है। मौजूदा युद्ध और तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर खतरे की स्थिति बनी हुई है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि पाकिस्तान सरकार को ईंधन की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी।
जनता में गुस्सा और बेचैनी
सरकार के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं और लोग भविष्य में और बढ़ोतरी की आशंका से चिंतित हैं। सोशल मीडिया पर भी सरकार के इस फैसले की आलोचना हो रही है।
सरकार ने दी चेतावनी
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि ईंधन आपूर्ति को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं।
वैकल्पिक रास्तों से आ रहे तेल पोत
सरकार के अनुसार पाकिस्तान के दो तेल टैंकर वैकल्पिक समुद्री मार्गों से देश की ओर आ रहे हैं। इन टैंकरों के पहुंचने के बाद ईंधन की आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि मौजूदा संकट कितने समय तक चलेगा, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है।
भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट का संकट लंबा चलता है तो पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बल्कि आम जनता के जीवन पर भी गहरा पड़ सकता है। महंगाई पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है और अब ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी हालात को और गंभीर बना सकती है।