Social Sharing icon

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग शिष्यों से कथित यौन शोषण के आरोपों में प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वाराणसी में मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि यदि कोई सीडी है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में सहयोग की बात कही और अंतिम निर्णय ईश्वर की अदालत पर छोड़ने की बात दोहराई।

वाराणसी/प्रयागराज। धार्मिक और राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ नाबालिगों से कथित यौन शोषण के आरोपों में प्रयागराज के Jhunsi Police Station में एफआईआर दर्ज की गई। मामला सामने आते ही सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। सोमवार को वाराणसी में मीडिया से मुखातिब होते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस गिरफ्तार करना चाहती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। “जनता सब देख रही है और अंतिम निर्णय वही देगी,” उन्होंने कहा।

‘हमारा अंत:करण गवाही दे रहा है’

स्वामी ने भावुक अंदाज में कहा कि उनका हृदय और अंत:करण स्पष्ट कहता है कि वे निर्दोष हैं। “ऊपर ईश्वर देख रहा है कि कौन सही है, कौन गलत। जो झूठ है, वह देर-सबेर सामने आ ही जाता है,” उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि यह एक गढ़ी हुई कहानी है। “आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, सत्य सामने आएगा,” उनका कहना था।

गुरुकुल से कोई संबंध नहीं?

शंकराचार्य ने कहा कि जिन लड़कों का नाम लिया जा रहा है, वे उनके गुरुकुल के छात्र ही नहीं हैं। “वे हरदोई के एक विद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं। उनकी मार्कशीट से इसका प्रमाण मिलता है। जब वे हमारे यहां पढ़े ही नहीं, आए ही नहीं, तो फिर यह आरोप कैसे संभव है?” उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रम फैलाने के लिए “सीडी” शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। “अगर कोई सीडी है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? सच्चाई सामने आने दीजिए,” उन्होंने कहा।

सियासत भी गरमाई

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने पुलिस कार्रवाई का विरोध जताते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिया है। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला गंभीर है और निष्पक्ष जांच की जाएगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

धार्मिक संस्थानों पर उठते सवाल

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कानून को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए, ताकि सत्य स्पष्ट हो सके। सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या दबाव से बचते हुए जांच पूरी की जानी चाहिए।

जांच का इंतजार

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यदि आवश्यक हुआ तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे कानून और जांच प्रक्रिया का सम्मान करते हैं। “हम न्यायपालिका और ईश्वर की अदालत, दोनों पर भरोसा रखते हैं,” उन्होंने दोहराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और बयानबाजी इस प्रकरण को और नया मोड़ दे सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *