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भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद बनाने की दिशा में बड़ा मोड़ आ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी से दो दिनों की इजरायल यात्रा पर जा रहे हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरे में हाई-एनर्जी लेजर वेपन ‘आयरन बीम’, लंबी दूरी की मिसाइल और एडवांस ड्रोन सिस्टम जैसे अत्याधुनिक हथियारों पर बड़ी रक्षा डील की रूपरेखा तैयार हो सकती है। अगर यह समझौता होता है तो भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड को अभूतपूर्व तकनीकी बढ़त मिल सकती है।

हाई-एनर्जी लेजर वेपन, एडवांस ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइल… क्या भारत-इजरायल मेगा डील के मुहाने पर?

भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग बीते दशक में नई ऊंचाई पर पहुंचा है। अब एक बार फिर जब Narendra Modi इजरायल दौरे पर जा रहे हैं, तो रक्षा सौदों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी के एक नए अध्याय का संकेत हो सकती है।

इजरायल: भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर

पिछले दस वर्षों में इजरायल भारत का अहम रक्षा सहयोगी बनकर उभरा है। ड्रोन टेक्नोलॉजी, प्रिसिजन गाइडेड बम, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार नेटवर्क में इजरायल की विशेषज्ञता विश्व स्तर पर मानी जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अब अपनी भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को शामिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

‘आयरन बीम’ से बदलेगा गेम?

इजरायल का हाई-एनर्जी लेजर वेपन Iron Beam पारंपरिक मिसाइल डिफेंस से अलग है। यह लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन है, जो ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार शेल को हवा में ही निष्क्रिय कर सकता है। जहां भारत के डीआरडीओ ने 30 किलोवाट लेजर सिस्टम विकसित किए हैं, वहीं इजरायल का ‘आयरन बीम’ 100 किलोवाट क्षमता के साथ ज्यादा शक्तिशाली माना जा रहा है। इसकी एक खासियत यह भी बताई जाती है कि प्रति शॉट लागत बहुत कम है। अगर यह तकनीक साझा उत्पादन या ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत आती है, तो भारत की एयर डिफेंस रणनीति में बड़ा बदलाव संभव है।

‘सुदर्शन चक्र’ को मिलेगा बूस्टर?

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित करने की बात कही थी। इस सिस्टम में Barak-8 जैसे मिड-रेंज और लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। अगर इजरायल के Iron Dome, David’s Sling और अन्य इंटरसेप्टर सिस्टम के साथ तकनीकी तालमेल बनता है, तो 2035 तक भारत के प्रमुख शहरों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।

8.6 अरब डॉलर की आहट?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 तक भारत और इजरायल के बीच लगभग 8.6 अरब डॉलर की संभावित रक्षा डील की चर्चा है। यदि ऐसा होता है, तो फ्रांस के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन सकता है।

डील में जिन हथियारों की चर्चा है, उनमें शामिल हैं—

  • SPICE प्रिसिजन गाइडेड बम
  • 250 किमी रेंज वाली Rampage मिसाइल
  • Air LORA बैलिस्टिक मिसाइल
  • 300 किमी तक मार करने वाला IceBreaker मिसाइल सिस्टम

इन हथियारों से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता और सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

मल्टी-लेयर एयर डिफेंस का विजन

भारत की रणनीति अब एक बहु-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड विकसित करने की है—जहां S-400, स्वदेशी सिस्टम और संभावित इजरायली टेक्नोलॉजी मिलकर एक समेकित ढाल तैयार करें। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन युद्ध और मिसाइल खतरे के दौर में लेजर वेपन भविष्य की रक्षा नीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मेक इन इंडिया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह संभावित साझेदारी सिर्फ खरीद तक सीमित रहेगी या साझा निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तक जाएगी? यदि संयुक्त उत्पादन होता है, तो ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात दोनों को नई गति मिल सकती है। इससे देश में रोजगार सृजन और रक्षा अनुसंधान को भी मजबूती मिलेगी।

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