पटना में रविवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई जब आंध्र प्रदेश पुलिस की विशेष टीम फायर ब्रिगेड के आईजी और बिहार कैडर के 2005 बैच के IPS अधिकारी एम. सुनील नायक को हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार करने उनके आवास पहुंची। सुबह 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। हालांकि, ट्रांजिट रिमांड की तैयारी के बीच ही हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ऑर्डर आ गया और पूरा घटनाक्रम अचानक बदल गया। 2021 के कथित हिरासत मारपीट मामले से जुड़ा यह विवाद अब एक बार फिर सुर्खियों में है।
सुबह 6 बजे की दस्तक… और बढ़ा सियासी पारा
पटना के पॉश इलाके में रविवार सुबह अचानक पुलिस की हलचल बढ़ गई। आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम सीधे फायर विभाग के आईजी एम. सुनील नायक के आवास पर पहुंची। आरोप गंभीर था—पूर्व सांसद के साथ हिरासत में मारपीट और हत्या के प्रयास (IPC 307)। टीम उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र ले जाने की पूरी तैयारी में थी। लेकिन जैसे ही गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ी, उसी समय हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई और अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। यह आदेश आते ही पूरा घटनाक्रम बदल गया। पुलिस टीम को कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक पीछे हटना पड़ा।
2021 से जुड़ा है विवाद… जब CID में थे तैनात
यह पूरा मामला मई 2021 का है, जब एम. सुनील नायक आंध्र प्रदेश में CID में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। उसी दौरान नरसापुरम से तत्कालीन सांसद रहे के. रघुराम कृष्णा राजू को कोविड काल में गिरफ्तार किया गया था। राजू ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत फंसाया गया और हिरासत में शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी, इसके बावजूद उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर गुंटूर ले जाया गया।
धारा 307 की एंट्री… और केस ने लिया नया मोड़
2023 में राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद रघुराम कृष्णा राजू ने हत्या के प्रयास की FIR दर्ज कराई। इस एफआईआर में तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी समेत पांच लोगों के नाम शामिल किए गए। इनमें एम. सुनील नायक, एक अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और कुछ मेडिकल प्रशासनिक अधिकारी भी आरोपी बनाए गए। आरोप है कि हिरासत में जानलेवा हमला किया गया, जो IPC 307 के तहत दंडनीय है।
कौन हैं IPS सुनील नायक?
- 2005 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी
- मूल रूप से आंध्र प्रदेश के निवासी
- वर्तमान में बिहार फायर ब्रिगेड में IG पद पर तैनात
- कड़क और सख्त प्रशासनिक छवि
- आंध्र प्रदेश CID में डेप्युटेशन के दौरान विवादों में आए
उनकी छवि एक सख्त और परिणाम-उन्मुख अधिकारी की रही है, लेकिन यह मामला उनके करियर पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बनकर सामने आया है।
ट्रांजिट रिमांड क्या होता है?
जब किसी आरोपी को एक राज्य से गिरफ्तार कर दूसरे राज्य में ले जाना होता है, तो स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड लिया जाता है। आंध्र प्रदेश पुलिस इसी प्रक्रिया के तहत उन्हें पटना से हिरासत में लेकर जाना चाहती थी। हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर ने फिलहाल इस प्रक्रिया को रोक दिया है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी बाकी है।
सियासी रंग भी गहरा
यह मामला सिर्फ एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी भर नहीं है। इसमें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, सत्ता परिवर्तन के बाद दर्ज हुई एफआईआर और प्रशासनिक दबाव जैसे कई आयाम जुड़े हैं। समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है, जबकि विरोधी इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।