14 फरवरी 1998… तमिलनाडु का कोयंबटूर शहर अचानक बम धमाकों की गूंज से कांप उठा था। एक के बाद एक 19 धमाकों ने पूरे शहर को दहशत, चीखों और खून के मंजर में बदल दिया। 58 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हुए। उसी दिन वर्तमान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी वहां मौजूद थे और एक धमाके में बाल-बाल बचे। अब बरसी पर उन्होंने उस दिन को “देश के इतिहास का काला अध्याय” बताते हुए अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल याद किया है।
धमाकों से दहला कोयंबटूर
14 फरवरी 1998 को तमिलनाडु के दूसरे सबसे बड़े शहर कोयंबटूर में आतंक का ऐसा तांडव हुआ, जिसने देश को झकझोर दिया। उस दिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उस समय के दिग्गज चेहरा Lal Krishna Advani की सभा प्रस्तावित थी। सभा से पहले ही शहर के अलग-अलग इलाकों में सिलसिलेवार 19 बम धमाके हुए। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक खिड़कियां कांप उठीं। बाजार खून से लाल हो गए, सड़कें सन्नाटे और चीखों से भर गईं। महज कुछ मिनटों में खुशियों का शहर मातम के शहर में बदल गया।
58 जिंदगियां खत्म… सैकड़ों घायल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन सीरियल ब्लास्ट में 58 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए। कई परिवार ऐसे थे जिनका इकलौता कमाने वाला सदस्य इस हमले में मारा गया। कई बच्चे उस दिन अनाथ हो गए। हमले का मकसद स्पष्ट था – आडवाणी की सभा को निशाना बनाना। हालांकि सुरक्षा कारणों से उनका कार्यक्रम बदल गया और वह हमले की चपेट में नहीं आए।
“मैं मौत के बेहद करीब था” – उपराष्ट्रपति का भावुक बयान
बरसी के मौके पर भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उस दिन को याद किया। उन्होंने लिखा: “14 फरवरी 1998 को हुए कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट में मारे गए निर्दोष लोगों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं। वह दिन इतिहास का एक काला अध्याय है। मैं खुद एक धमाके में बाल-बाल बचा था। घायलों को अस्पताल पहुंचाने का संघर्ष मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक समय था।” उन्होंने कहा कि उस दिन का डर, दुख और अनिश्चितता आज भी उनकी यादों में ताजा है। धुएं से भरा आसमान, भागते लोग, एंबुलेंस की आवाज और सायरन – सब कुछ जैसे आंखों के सामने आज भी घूम जाता है।
आडवाणी के दौरे के समय दहशत
धमाके ऐसे समय हुए जब पूरा प्रशासन आडवाणी की सुरक्षा में लगा था। सुरक्षा एजेंसियों को भनक थी कि माहौल तनावपूर्ण है, लेकिन 19 अलग-अलग स्थानों पर धमाकों की योजना ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया।यह हमला तमिलनाडु और देश की राजनीति के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद पूरे देश में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।
आतंक के खिलाफ एकजुटता का संदेश
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट रहना होगा। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता, लेकिन हम शांति, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के जरिए आतंक के मंसूबों को विफल कर सकते हैं।