ब्रिटेन की राजनीति इस समय अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सत्ता डेढ़ साल में ही डगमगा गई है। मैंडेलसन-एपस्टीन विवाद के बाद लेबर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ सलाहकारों के इस्तीफे, विपक्ष के तीखे हमले और अपनी ही पार्टी के सांसदों के विद्रोह ने स्टारमर की कुर्सी पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ब्रिटेन में जल्द नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं।
ब्रिटेन में सत्ता का गलियारा इस समय भारी राजनीतिक भूचाल से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, जिन्होंने महज डेढ़ साल पहले लेबर पार्टी को सत्ता में पहुंचाया था, अब अपने राजनीतिक करियर के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं। उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है और यह संकट किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर उठे असंतोष से पैदा हुआ है। इस पूरे विवाद की जड़ हैं पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन, जिन्हें प्रधानमंत्री स्टारमर ने एक अहम भूमिका में नियुक्त किया था। मैंडेलसन और कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच संबंधों से जुड़े ईमेल सामने आने के बाद ब्रिटिश राजनीति में तूफान खड़ा हो गया। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ, जब लेबर पार्टी पहले ही चुनावी सर्वेक्षणों में कमजोर स्थिति में नजर आ रही थी।
चुनावी सर्वे और बढ़ती बेचैनी
बीते एक साल से लेबर पार्टी, निगेल फराज की धुर दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी से लगातार पिछड़ रही है। कई सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी दोहरे अंकों के अंतर से पीछे चल रही है। इन आंकड़ों ने लेबर सांसदों की चिंता बढ़ा दी है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सांसदों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी आशंका ने स्टारमर के खिलाफ अंदरूनी विद्रोह को हवा दी है।
सलाहकारों के इस्तीफे ने बढ़ाया संकट
संकट तब और गहरा गया जब रविवार को प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके ठीक अगले दिन, सोमवार को संचार निदेशक टिम एलन ने भी पद छोड़ने का ऐलान कर दिया। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने यह संकेत दे दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट में सब कुछ ठीक नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह अचानक पद छोड़ना, किसी भी सरकार के लिए खतरे की घंटी होता है। इससे न केवल प्रशासनिक स्थिरता पर सवाल उठते हैं, बल्कि नेतृत्व की विश्वसनीयता भी कमजोर होती है।
मैंडेलसन-एपस्टीन विवाद की जड़
पीटर मैंडेलसन का नाम उस समय विवादों में आया, जब यह खुलासा हुआ कि उन्होंने 2008 में जेफरी एपस्टीन के दोषी ठहराए जाने के बाद भी उनके साथ संपर्क बनाए रखा था। ईमेल के जरिए सामने आए इस संबंध ने लेबर पार्टी को असहज कर दिया। पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे कि ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई, जिनका नाम इस तरह के गंभीर विवाद से जुड़ा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह नियुक्ति स्टारमर की निर्णय क्षमता पर सवाल खड़े करती है।
बंद कमरों में सांसदों को मनाने की कोशिश
अपनी कमजोर पड़ती सत्ता को बचाने के लिए प्रधानमंत्री स्टारमर इन दिनों बंद कमरों में लेबर सांसदों से मुलाकात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे पार्टी के असंतुष्ट सांसदों को मनाने और अपने नेतृत्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा। कई सांसद ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
सार्वजनिक रूप से शांत, अंदरखाने दबाव
एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में, नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री स्टारमर ने डाउनिंग स्ट्रीट के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए देश में बदलाव की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रवक्ता ने भी पत्रकारों से कहा कि स्टारमर अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और वे “सकारात्मक” महसूस कर रहे हैं। हालांकि, लेबर सांसदों के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि उनका कार्यकाल समय से पहले समाप्त हो सकता है।
विपक्ष का तीखा हमला
कंजर्वेटिव पार्टी की विपक्षी नेता केमी बैडेनोच ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। उन्होंने बीबीसी रेडियो से बातचीत में कहा, “सलाहकार सलाह देते हैं, लेकिन फैसले नेता लेते हैं। स्टारमर ने गलत फैसला लिया है और अब उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।” उन्होंने प्रधानमंत्री की स्थिति को “अस्वीकार्य” करार देते हुए कहा कि देश को कमजोर नेतृत्व का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
लेबर पार्टी के भीतर भी उबाल
लेबर पार्टी के भीतर खासतौर पर वामपंथी धड़े के सांसद खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। ये वही सांसद हैं, जो शुरू से ही स्टारमर के मध्यमार्गी रुख के आलोचक रहे हैं। कई निचले स्तर के सांसदों ने सुझाव दिया है कि जैसे उनके चीफ ऑफ स्टाफ ने पद छोड़ा, वैसे ही प्रधानमंत्री को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। यह मांग अब सिर्फ बंद कमरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनती जा रही है।
क्या बच पाएगी स्टारमर की कुर्सी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह कीर स्टारमर के भविष्य का फैसला करेंगे। यदि वे पार्टी के भीतर भरोसा बहाल करने में असफल रहे, तो लेबर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन की ओर बढ़ सकती है। ब्रिटेन की राजनीति में यह संकट ऐसे समय आया है, जब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक दबावों से जूझ रहा है। ऐसे में नेतृत्व में अस्थिरता का असर देश की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें डाउनिंग स्ट्रीट पर टिकी हैं—क्या कीर स्टारमर इस राजनीतिक तूफान से उबर पाएंगे, या ब्रिटेन को जल्द ही नया प्रधानमंत्री देखने को मिलेगा?