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उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक सरकारी स्कूल में उस समय सनसनी फैल गई जब महापुरुषों की तस्वीरों की जगह दीवारों पर कुरान की आयतें और इस्लामिक धार्मिक स्थलों की तस्वीरें चस्पा मिलने का मामला सामने आया। इस घटना ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने स्कूल परिसर में पहुंचकर जमकर हंगामा किया। आरोप-प्रत्यारोप, पुलिस की मौजूदगी और शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई के बीच यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बनियाखेड़ा विकास खंड स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय नगला पूर्वा में शुक्रवार को अचानक माहौल गरमा गया। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल में महापुरुषों की तस्वीरें हटाकर उनकी जगह कुरान की आयतें और इस्लामिक धार्मिक स्थलों की तस्वीरें लगा दी गई हैं। जैसे ही यह सूचना संगठन के पदाधिकारियों तक पहुंची, वे बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल पहुंच गए।

स्कूल परिसर में हंगामा

विद्यालय पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने प्रधानाध्यापक कक्ष के समीप एक कमरे के दरवाजे के ऊपर दीवार पर लगी कुरान की आयतों और इस्लामिक स्थलों की तस्वीरों को देखा। इस पर उन्होंने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा। आरोप है कि जब प्रधानाध्यापक की ओर से संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो कार्यकर्ता भड़क उठे और जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। विश्व हिंदू परिषद के विभाग सत्संग प्रमुख ऋतुपर्ण शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूल में इस प्रकार की धार्मिक सामग्री लगाना नियमों के खिलाफ है और इससे बच्चों पर एक विशेष विचारधारा थोपने की कोशिश की जा रही है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसे “इस्लामिक जिहाद को बढ़ावा देने की साजिश” तक करार दिया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति बिगड़ती देख किसी ने तुरंत थाना कुढ़ फतेहगढ़ पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। काफी देर तक विद्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए।

शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई

मामला बढ़ता देख बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अलका शर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया और प्राथमिक जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान सामने आया कि महापुरुषों की तस्वीरें हटाने के मामले में सहायक अध्यापक मोहम्मद नाजिम की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

वहीं, स्कूल की प्रधानाध्यापिका पुष्पा रानी पर भी कार्रवाई की गई। शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि मिड-डे मील निरीक्षण के दौरान कई खामियां पाई गई थीं। इसके अलावा विद्यालय परिसर में लगभग 15 साल पुराने सहजन के पेड़ को बिना अनुमति कटवाने का मामला भी सामने आया। इन आरोपों के आधार पर प्रधानाध्यापिका को भी सस्पेंड कर दिया गया।

शिक्षा के मंदिर में विवाद से बढ़ी चिंता

इस घटना ने शिक्षा जगत में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी स्कूल, जिन्हें बच्चों के सर्वांगीण विकास और निष्पक्ष शिक्षा का केंद्र माना जाता है, वहां इस प्रकार के विवाद सामने आने से अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों को धार्मिक और राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ संगठनों ने शिक्षा विभाग की कार्रवाई को सही बताया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इसे प्रशासन की लापरवाही बता रहा है, तो कोई इसे साजिश करार दे रहा है।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।संभल के इस सरकारी स्कूल में सामने आया यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा संस्थानों में धार्मिक निष्पक्षता और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। दो शिक्षकों के निलंबन के बाद फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन जांच की दिशा और अंतिम निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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