UP NEWS70 करोड़ रुपये बकाये में फंसी नवाबगंज चीनी मिल।

बरेली। गन्ना किसानों के करीब 70 करोड़ रुपये के बकाये में फंसी नवाबगंज चीनी मिल की अब पूरी तरह बिक्री की तैयारी है। पुणे के बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये किया है। इसके बाद प्रशासन ने मिल के लिए खरीदार की तलाश शुरू कर दी है। बिक्री से मिलने वाली रकम से किसानों का बकाया चुकाने की तैयारी है।

तीन साल से भुगतान के लिए बना रहा दबाव

नवाबगंज चीनी मिल पर गन्ना किसानों का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। प्रशासन की ओर से मिल प्रबंधन पर लगातार दबाव बनाया गया, लेकिन पूरा भुगतान नहीं हो सका। बकाया बढ़ने के बाद शासन के निर्देश पर मिल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इसके बाद आरसी जारी कर मिल की जमीन कुर्क करने की कार्रवाई की गई।

15.48 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ तक पहुंचा बकाया

पेराई सत्र 2023-24 में चीनी मिल पर किसानों का 107.12 करोड़ रुपये बकाया था। इसमें से मिल प्रबंधन ने 91.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि 15.48 करोड़ रुपये बाकी रह गए। पेराई सत्र 2024-25 में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन इस रकम का भुगतान नहीं किया गया। इससे किसानों की बकाया धनराशि बढ़कर 54.93 करोड़ रुपये हो गई। ब्याज जुड़ने के बाद अब यह रकम करीब 70 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पिछले पेराई सत्र में नहीं मिला था गन्ना

किसानों का भुगतान नहीं होने के कारण पिछले पेराई सत्र में नवाबगंज चीनी मिल को गन्ना आवंटित नहीं किया गया। भुगतान के दूसरे प्रयास सफल नहीं होने के बाद प्रशासन ने मिल की नीलामी और बिक्री की दिशा में कदम बढ़ाए।

तकनीकी टीम ने 180 करोड़ आंकी मिल की कीमत

बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने चीनी मिल का मूल्यांकन किया। टीम ने पूरी मिल की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी है। इसी मूल्यांकन को आधार बनाकर अब मिल बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी, खरीदार की तलाश

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने चीनी मिल की बिक्री के लिए एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। प्रशासनिक स्तर पर संभावित खरीदारों की तलाश की जा रही है। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी के मुताबिक अब केवल चीनी मिल की जमीन की नहीं, बल्कि पूरी चीनी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों के लंबे समय से अटके बकाये के भुगतान का रास्ता साफ हो सकेगा।

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