शाहजहांपुर। शाहजहांपुर के जलालाबाद में खाकी को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। तिलहर थाने में तैनात चार सिपाहियों ने एक सराफा व्यापारी को जाल बिछाकर सुनसान स्थान पर बुलाया। इसके बाद उसकी जेब से संदिग्ध पदार्थ की पुड़िया बरामद दिखाकर तस्करी में जेल भेजने और एनकाउंटर की धमकी दी। करीब चार घंटे तक कथित तौर पर पीटने और प्रताड़ित करने के बाद परिवार से दो लाख रुपये वसूलकर उसे छोड़ा गया। जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर चारों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दो सिपाहियों और एक अज्ञात व्यक्ति की तलाश जारी है।
जेवर गिरवी रखने के बहाने बुलाया, रास्ते में घेरा
जलालाबाद के मोहल्ला कानूनगोयान निवासी सुंदरम क्षत्रिय की मदनापुर थाना क्षेत्र के बुधुवाना में सराफा दुकान है। सुंदरम के मुताबिक, चार सितंबर की रात उनके पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने दस हजार रुपये की जरूरत बताते हुए जेवर गिरवी रखने की बात कही। दोबारा फोन कर उन्हें सरैया मोड़ के पास बुलाया गया। आरोप है कि रात करीब 9:56 बजे सुंदरम वहां पहुंचे तो दो बाइकों से सादे कपड़ों में चार सिपाही आए। उनकी पहचान अरुण चित्तौड़िया, पंकज, तुषार और वीरेंद्र के रूप में हुई। सुंदरम इन पुलिसकर्मियों को पहले से जानते थे।
जेब से पुड़िया निकालकर बताया मादक पदार्थ
व्यापारी का आरोप है कि चारों सिपाही उन्हें भटादेवर रोड स्थित सुनसान जगह पर ले गए। वहां तलाशी के दौरान उनकी जेब से एक पॉलिथीन निकालकर उसमें मादक पदार्थ होने का दावा किया गया। इसके बाद उन्हें तिलहर की बिरियागंज पुलिस चौकी ले जाया गया। सुंदरम के अनुसार, चौकी में उन्हें डंडों से पीटा गया और स्मैक की तस्करी कबूल करने का दबाव बनाया गया। जुर्म स्वीकार नहीं करने पर जेल भेजने और एनकाउंटर करने की धमकी दी गई।
बाइक से निकाला पेट्रोल, दी अमानवीय यातना की धमकी
पीड़ित ने आरोप लगाया कि सिपाहियों ने चौकी में खड़ी बाइक से पॉलिथीन में पेट्रोल निकाला और तस्करी कबूल न करने पर प्राइवेट पार्ट में डालने की धमकी दी। सुंदरम लगातार मिन्नतें करते रहे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें नहीं छोड़ा। आरोप है कि इसके बाद सिपाहियों ने उनके पिता राजेश क्षत्रिय और परिवार के अन्य लोगों को फोन कर रुपये मांगे। व्यापारी को पुलिस के कब्जे में होने और एनकाउंटर की धमकी मिलने से पूरा परिवार दहशत में आ गया।
परिवार ने जुटाए दो लाख, रात दो बजे मिली रिहाई
परिवार ने रात में ही किसी तरह दो लाख रुपये का इंतजाम किया। सुंदरम का आरोप है कि रकम पहुंचने के बाद ही रात करीब दो बजे उन्हें छोड़ा गया। इस दौरान वह करीब चार घंटे तक पुलिसकर्मियों के कब्जे में रहे। पुलिसकर्मियों के चंगुल से छूटने के बाद सुंदरम ने अगले दिन आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वह परशुरामपुरी थाने पहुंचे और अधिकारियों को घटना की जानकारी दी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज बने अहम सबूत
पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों को घटना से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ स्थानों के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए। सुंदरम का कहना है कि आरोपी पुलिसकर्मी पहले जलालाबाद थाने में तैनात रह चुके हैं। उन्होंने उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी फोन कर धमकाया था, जिसकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज पांडेय के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
जांच में प्रथमदृष्टया सही मिले आरोप
एसपी सिटी देवेंद्र कुमार ने बताया कि सीओ परशुरामपुरी दीपक कुमार सिंह और सीओ तिलहर विदुष सक्सेना ने प्रकरण की जांच की। जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद चारों सिपाहियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ जबरन वसूली, अवैध रूप से बंधक बनाने और धमकी देने समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
चारों सिपाही निलंबित, दो गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपी सिपाही पंकज और वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों वर्ष 2021 बैच के सिपाही बताए गए हैं। अरुण चित्तौड़िया और तुषार समेत एक अज्ञात आरोपी अभी फरार है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। अज्ञात आरोपी के मोबाइल नंबर के आधार पर भी उसकी तलाश की जा रही है। एसपी सौरभ दीक्षित ने चारों आरोपी सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, चारों पुलिसकर्मी मेरठ मंडल के रहने वाले हैं। मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।