बरेली, 26 अगस्त। पैगम्बर-ए-इस्लाम की 1501वीं यौमे पैदाइश के मौके पर बुधवार को बरेली में जुलूस-ए-मोहम्मदी पारंपरिक शान-ओ-शौकत और अकीदत के साथ निकाला गया। अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के तत्वावधान में आयोजित जुलूस दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान सुब्हानी और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी अहसन मियां की कयादत में निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अंजुमनों के पदाधिकारी, जायरीन और अकीदतमंद शामिल हुए।
उलेमाओं ने नबी-ए-करीम की तालीमात पर डाली रोशनी
जुलूस से पहले दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां के आवास और कोहाड़ापीर स्थित जुलूस मंच पर उलेमाओं ने नबी-ए-करीम की जिंदगी, उनकी तालीमात और इंसानियत के लिए दिए गए संदेश पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत मुफ्ती जईम रजा ने तिलावत-ए-कुरान से की। इसके बाद नात-ओ-मनकबत पेश की गई।
परचम-ए-रिसालत सौंपकर रवाना किया गया जुलूस
जुलूस के कायद हजरत सुब्हानी मियां ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां को और मुफ्ती अहसन मियां ने सुबूर रजा को परचम-ए-रिसालत सौंपा। शाम करीब 5:30 बजे परचम सौंपे जाने के बाद जुलूस रवाना हुआ। जुलूस में शामिल अंजुमनों ने नातिया नारों और धार्मिक उद्घोषों के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
कोहाड़ापीर से दरगाह आला हजरत तक निकला जुलूस
जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से कोहाड़ापीर से कुतुबखाना, जिला अस्पताल, कुमार सिनेमा और कोतवाली होते हुए दरगाह हजरत पहलवान मियां पहुंचा। यहां सलामी देने के बाद जुलूस नावेल्टी चौराहा, राजकीय इंटर कॉलेज, खलील तिराहा, करोलान और बिहारीपुर ढाल होते हुए देर रात दरगाह आला हजरत पहुंचकर संपन्न हुआ।
हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने फूल बरसाकर किया स्वागत
जुलूस के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने फूलों से इसका स्वागत किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों का इस्तकबाल किया। रंग-बिरंगी पोशाक, पगड़ी और जुब्बा पहने अंजुमनों के लोग नातिया नारों के साथ जुलूस में आगे बढ़ते रहे।
नबी ने भेदभाव खत्म कर बराबरी का संदेश दिया: मुफ्ती सलीम नूरी
मंच से संबोधित करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम ने अगड़े-पिछड़े, ऊंच-नीच और काले-गोरे के भेदभाव को खत्म कर सभी को बराबरी का दर्जा दिया। उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम ने जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने और दुनिया को अमन-शांति का पैगाम देने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि यह जुलूस नबीरे आला हजरत हुजूर रेहान-ए-मिल्लत की देन है। इसके अलावा मुफ्ती अय्यूब खान नूरी और मुफ्ती जमील ने भी संबोधित किया।
उलेमाओं और अंजुमनों के पदाधिकारियों की हुई दस्तारबंदी
कार्यक्रम में हजरत सुब्हानी मियां, मुफ्ती अहसन मियां, सय्यद आसिफ मियां और विभिन्न अंजुमनों के सदर के मंच पर पहुंचने पर अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सचिव शान अहमद रजा ने दस्तारबंदी कर फूलों से स्वागत किया। अंजुमन के सदर सय्यद आसिफ मियां ने जुलूस की व्यवस्था संभालने वाले लोगों की दस्तारबंदी कर उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किए।
कई प्रमुख अंजुमनों ने लिया हिस्सा
नासिर कुरैशी के मुताबिक जुलूस में अंजुमन अनवारे मुस्तफा, अंजुमन गौसुल वरा, अंजुमन आशिकाने रजा, अंजुमन जानिसारने रसूल, अंजुमन कुर्बान-ए-रसूल, अंजुमन रजा-ए-मिल्लत और अंजुमन फैजुल कुरान समेत कई अंजुमनों ने हिस्सा लिया। सबसे आगे परतापुर जीवन सहाय की अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा और रेलवे जंक्शन की अंजुमन अनवारे मुस्तफा शामिल रही।
जुलूस के समापन पर बांटी गई मिठाई और लंगर
जुलूस देर रात दरगाह आला हजरत पहुंचकर सकुशल संपन्न हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच मिठाई और लंगर वितरित किया गया। जुलूस की व्यवस्था में राशिद अली खान, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, शाहिद नूरी, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, शारिक बरकाती, तारिक सईद, आलेनबी, नईम नूरी, इशरत नूरी, आसिम रजा, हाजी राशिद हुसैन, सय्यद माजिद, मंजूर रजा, मुजाहिद रजा, यूनुस गद्दी, मोहसिन रजा, काशिफ सुब्हानी, मुस्तकीम नूरी, इरशाद रजा, साजिद नूरी, सय्यद एजाज, फारूक खान, अशमीर रजा, यूनुस साबरी, मोहम्मद आसिफ, सुहैल रजा और गौहर खान समेत अन्य लोगों ने सहयोग किया।
सफल आयोजन पर प्रशासन और सहयोगियों का जताया आभार
जुलूस के सकुशल संपन्न होने के बाद अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सदर सय्यद आसिफ मियां और सचिव शान रजा ने जुलूस के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले जिला प्रशासन समेत सभी लोगों का आभार जताया।