बरेली। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज हाईप्रोफाइल मुकदमे में जेल भेजी गईं कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को एडीजे आठ अशोक कुमार यादव की कोर्ट से जमानत मिल गई है। मंत्री ने कल्पना पर अपने पदनाम और पति गिरधारी लाल साहू के नाम-पते का दुरुपयोग करने समेत चोरी, जालसाजी और उनके पद नाम का रौब दिखाकर धन उगाही के गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं कल्पना ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को रंजिशन फंसाने का दावा किया है।
मंत्री ने लगाए नाम-पते के दुरुपयोग के आरोप
एफआईआर में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने आरोप लगाया कि कल्पना मिश्रा ने आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे व्यक्तिगत दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम तथा बरेली स्थित आवास का पता दर्ज करा रखा था। कल्पना मंत्री के नाम और पद का इस्तेमाल कर लोगों पर प्रभाव जमाती और कथित रूप से धन उगाही करती थीं। कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी जिस हुंडई क्रेटा कार से चलती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगाई गई थी। मंत्री ने कल्पना और उनके कथित मौसा डॉ. आरसी पांडेय की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
सात लाख रुपये और रुद्राक्ष की माला चोरी करने का भी आरोप
मंत्री रेखा आर्य ने बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की माला चोरी होने का आरोप भी लगाया। शिकायत के आधार पर बारादरी थाने में नौ सितंबर 2024 को तत्कालीन आईजी डा. राकेश सिंह के आदेश पर विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पहले मुकदमे में एफआर लगाई गई थी। इसके बाद मुकदमे में पैरवी कर गुपचुप तरीके से उसकी विवेचना कराई गई। कल्पना को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई।
कल्पना का दावा, 25 हजार रुपये महीने पर बनाया था मैनेजर
जमानत की सुनवाई के दौरान कल्पना मिश्रा के वरिष्ठ अधिवक्ता लवलेश पाठक ने अदालत को बताया कि गिरधारी लाल साहू ने उन्हें अपने व्यापार में 25 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर मैनेजर नियुक्त किया था। इसके समर्थन में छह जुलाई 2022 को पंजीकृत अनुबंध पत्र भी अदालत के सामने पेश किया गया। नौकरी के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया तथा उनकी निजी रकम भी हड़प ली गई। शिकायत करने की बात कहने पर प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मुकदमे में फंसाया गया।
तीन बैनामों में मंत्री के आवास का पता दिखाने का दावा
मंत्री पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि कल्पना ने अलग-अलग तारीखों पर कराए गए तीन बैनामों में रेखा आर्य के बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया। इनमें 10.50 लाख, 12 लाख और 19 लाख रुपये के कथित लेनदेन वाले दस्तावेज शामिल बताए गए। अभियोजन ने आरोपों को गंभीर बताते हुए आशंका जताई कि जमानत मिलने पर साक्ष्य प्रभावित किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने इन आधारों पर स्वीकार की जमानत
अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। कल्पना के मंत्री के पति की मैनेजर होने के संबंध में पंजीकृत अनुबंध प्रस्तुत किया गया है। आधार कार्ड में पता बदला जा सकता है, जबकि पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों का पुलिस सत्यापन होता है। पेश रिकॉर्ड में दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला स्पष्ट उल्लेख नहीं पाया गया। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय से विचारणीय है और अभियुक्ता की पूर्व दोषसिद्धि की कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की एक जमानत प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्हें मुकदमे की सुनवाई में सहयोग करने और साक्ष्यों अथवा गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्तों का पालन करने की चेतावनी दी गई।
जैन हत्याकांड के आरोपी रहे हैं गिरधारी पप्पू
गिरधारी पप्पू बरेली हुये जैन हत्याकांड के आरोपी हैं। उन पर कोर्ट से फाइल गायब करने का भी आरोप लगा था। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा जैन हत्याकांड की फाइल स्रजित की गई। बरेली में पप्पू गिरधारी का बड़ा लंबा इतिहास रहा है। वह अपनी शादियों केा लेकर भी काफी चर्चा में रहते हैं। इसके अलावा साहू समाज के सम्मेलन से लेकर बरेली की राजनीति में एंट्री करने की छटपटाहट के कारण भी वह सुर्खियों में रहते हैं। इसके अतिरिक्त भी उन पर कई मुकदमे थे, जो अब पुलिस थानों से लेकर अदालतों तक जाकर निपट चुके हैं।