बरेली। विश्व प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग हजरत शाह मोहम्मद सकलैन मियां के तीसरे सालाना उर्स-ए-सकलैनी का रविवार को परचम कुशाई के साथ आगाज हो गया। खानकाह से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। रास्ते भर फूल बरसाकर जुलूस का स्वागत किया गया। इससे पहले खानकाह में हुई रूहानी तकरीरी महफिल में उलमा ने मोहब्बत, भाईचारे और आपसी सौहार्द का पैगाम दिया।
रविवार सुबह नमाज-ए-फज्र के बाद कुरआन ख्वानी हुई। सुबह 11 बजे खानकाह शरीफ के हॉल में रूहानी तकरीरी महफिल का आयोजन किया गया। इसकी सरपरस्ती सज्जादानशीन हजरत शाह मोहम्मद गाजी मियां ने की। अल्लामा मुफ्ती फहीम अजहरी सकलैनी और अल्लामा रुम्मान कादरी सकलैनी ने हजरत शाह सकलैन मियां की जिंदगी, तालीमात और रूहानी खिदमात पर रोशनी डाली। उन्होंने जायरीन से आपसी इत्तेहाद, मोहब्बत, भाईचारा और सौहार्द कायम रखने के साथ मियां हुजूर की तालीमात पर अमल करने की अपील की। महफिल में मजहर सकलैनी, आमिल ककरालवी, हसीब रौनक सकलैनी, अरबाज सकलैनी, अनस सकलैनी, इमरान सकलैनी और आफाक सकलैनी ने नात-ओ-मनकबत पेश की। निजामत मुख्तार तिलहरी सकलैनी ने की।
खानकाह से निकला परचम कुशाई का जुलूस
दोपहर तीन बजे नमाज-ए-जोहर के बाद खानकाह शरीफ से जुलूस-ए-परचम कुशाई रवाना हुआ। जुलूस कच्ची मस्जिद, ब्रह्मपुरा, शाहबाद चौक, कोहाड़ापीर चौराहा, नैनीताल रोड, कुतुबखाना चौराहा और गली मनिहारान से गुजरते हुए वापस दरगाह शरीफ पहुंचा। दरगाह पहुंचने पर सज्जादानशीन हजरत शाह मोहम्मद गाजी मियां ने परचम शरीफ नसब किया। इसी के साथ उर्स के कार्यक्रमों का विधिवत शुभारंभ हो गया।
फूल बरसाए, जगह-जगह लगाईं सबीलें
जुलूस के रास्ते में लोगों ने फूल-मालाओं और फूलों की बारिश कर स्वागत किया। जायरीन के लिए विभिन्न स्थानों पर पानी, दूध, शरबत, मिठाई और खाने-पीने की वस्तुओं की सबीलें लगाई गईं। जुलूस को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए उर्स इंतजामिया कमेटी के सदस्य भी पूरे रास्ते मुस्तैद रहे। जुलूस में अल्हाज सादकैन मियां, हाफिज गुलाम गौस सकलैनी, मौलाना फहीम सकलैनी, मौलाना हाफिज जाने आलम सकलैनी, मुर्तुजा सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, फैजयाब सकलैनी, जिया सकलैनी और सलमान सकलैनी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।