बरेली। मोबाइल निकाला, क्यूआर कोड स्कैन किया और भुगतान हो गया। रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी एकीकृत भुगतान प्रणाली यानी यूपीआई में अब दो हजार रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर बरेली में भी सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री प्रवीण सिंह ऐरन और पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है।
दो हजार रुपये से अधिक के निर्धारित व्यक्ति से व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होने से 10 हजार रुपये के भुगतान पर 40 रुपये और 50 हजार रुपये पर 200 रुपये की व्यापारी लागत बनेगी। ऐरन दंपती ने सवाल उठाया है कि आखिर इस अतिरिक्त खर्च का बोझ कौन उठाएगा। प्रवीण सिंह ऐरन और सुप्रिया ऐरन का कहना है कि बड़े कारोबारी अतिरिक्त खर्च को अपने कारोबार में समायोजित कर सकते हैं, लेकिन कम मुनाफे पर दुकान चलाने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह रकम मायने रखती है। व्यापारी इसे खुद चुकाता है तो उसका मुनाफा घटेगा और सामान की कीमत में जोड़ता है तो बोझ आखिरकार ग्राहक की जेब तक पहुंचेगा।
डिजिटल भुगतान का विरोध नहीं, अतिरिक्त बोझ पर सवाल
प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि उनका विरोध यूपीआई या डिजिटल भुगतान से नहीं है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन ने कहा कि महंगाई और दूसरे खर्चों के बीच छोटे व्यापारियों की मुश्किलें पहले से बढ़ी हुई हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ने के असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। छोटे दुकानदारों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त खर्च बढ़ाया जाए।
हर दो हजार से ऊपर के भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क
हालांकि दो हजार रुपये से अधिक का हर यूपीआई भुगतान इस शुल्क के दायरे में नहीं आएगा। सरकार के मुताबिक व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पर कोई शुल्क नहीं है। दो हजार रुपये तक के व्यक्ति से व्यापारी भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा। सरकार का दावा है कि करीब 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेन-देन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। ऐरन दंपती ने प्रधानमंत्री से व्यवस्था की समीक्षा कर छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए विकल्प तलाशने की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की चिंता केंद्र सरकार के सामने रखने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान बढ़े, लेकिन उसकी कीमत छोटे दुकानदारों को न चुकानी पड़े।