बरेली। देश की राजनीति में बरेली का डंका बजने वाला है। भाजपा ने राज्यसभा के लिये जिन आठ उम्मीदवारों की सूची जारी की है। उनमें दो चेहरे बरेली के हैं। पार्टी हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री पांच बार के विधायक धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। दो नेताओं के उम्मीदवार बनाये जाने पर बरेली में भाजपा नेताओं में खुशी की लहर है।
इस चयन का राजनीतिक संकेत भी अहम है। एक ओर संतोष गंगवार की दशकों पुरानी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का रास्ता खुला है, दूसरी ओर आंवला से पांच बार विधायक चुने गए धर्मपाल सिंह को संसदीय राजनीति में नई भूमिका का अवसर मिला है। सामाजिक समीकरणों के लिहाज से इसे कुर्मी और लोधी मतदाताओं के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में समझा जा सकता है।
आईआईटी से पढ़ाई, सहकारिता से पहचान और अब राज्यसभा की उम्मीदवारी
श्रुति गंगवार की पहचान अब तक सामाजिक गतिविधियों और सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय चेहरे की रही है। उन्होंने आईआईटी रुड़की से पढ़ाई की है। इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि रखने वाली श्रुति बरेली के अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं। शिक्षा और महिला आत्मनिर्भरता से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी रही है। अब राज्यसभा की उम्मीदवारी उनके सार्वजनिक जीवन का बड़ा राजनीतिक पड़ाव है। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक से गंगवार परिवार का पुराना जुड़ाव है। संतोष गंगवार इसके संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं। बाद में उनकी पत्नी सौभाग्यवती गंगवार ने अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। मां के निधन से रिक्त हुए निदेशक पद पर अगस्त 2024 में श्रुति चुनी गईं और इसके बाद बैंक की कमान उनके हाथ आई। इस तरह सहकारिता के क्षेत्र में पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें संसद के उच्च सदन का चुनाव लड़ने का मौका मिला है। श्रुति की उम्मीदवारी को समझने के लिए 2024 का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। उस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने आठ बार के सांसद संतोष गंगवार को टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह छत्रपाल सिंह गंगवार चुनाव लड़े और जीते। टिकट बदलने के बाद स्थानीय स्तर पर समर्थकों की नाराजगी भी सामने आई, लेकिन संतोष गंगवार पार्टी के साथ बने रहे। इसके बाद 27 जुलाई 2024 को उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने 31 जुलाई को शपथ ली। अब बेटी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से गंगवार परिवार की सक्रिय राजनीतिक भूमिका को नया विस्तार मिला है।
पहला विधानसभा चुनाव हारे, फिर आंवला से पांच बार जीते
बरेली से दूसरे प्रत्याशी धर्मपाल सिंह का सफर शिक्षा, ग्रामीण राजनीति और विधानसभा से होकर आगे बढ़ा है। आंवला क्षेत्र के गुलड़िया गौरीशंकर गांव में 15 जनवरी 1953 को जन्मे धर्मपाल सिंह के पिता का नाम मिश्री सिंह है। उन्होंने स्नातकोत्तर, एलएलबी और बीएड की पढ़ाई की है। उनकी पत्नी वंदना देवी हैं और परिवार में तीन पुत्र हैं। कृषि और अध्यापन से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। धर्मपाल सिंह वर्ष 1981 से 1988 तक गौरीशंकर उच्च माध्यमिक एवं इंटरमीडिएट कॉलेज में प्रधानाचार्य रहे। इसके बाद 1988 से 1993 तक मझगवां के ब्लॉक प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1993 से 1996 तक कृषि उत्पादन मंडी समिति के सभापति भी रहे। स्थानीय संस्थाओं में काम करने के इसी अनुभव ने उनकी आगे की राजनीति की जमीन तैयार की। धर्मपाल सिंह ने 1993 में भाजपा के टिकट पर तत्कालीन सन्हा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 1996 में आंवला से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2002 में दोबारा जीत हासिल की। वर्ष 2007 में यह सीट बसपा के पास चली गई, लेकिन 2012 में धर्मपाल ने वापसी की। उन्होंने 2017 और 2022 में भी जीत दर्ज की। इस तरह वह कुल पांच बार विधायक बने हैं। उनकी राजनीतिक पहचान लोधी समाज के प्रमुख नेताओं में रही है। आंवला और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से सक्रिय धर्मपाल को राज्यसभा का टिकट देकर भाजपा ने उनके अनुभव और सामाजिक आधार को महत्व दिया है।
कल्याण सिंह से योगी सरकार तक संभाली जिम्मेदारियां
धर्मपाल सिंह पहली बार विधायक बनने के बद 1997 में मायावती सरकार में लोक निर्माण और पर्यटन राज्यमंत्री बने। उसी वर्ष बाद में कल्याण सिंह सरकार में पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली। रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भी वह मंत्री रहे। वर्ष 2002 में मायावती सरकार में श्रम राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी संभाली। विधानसभा में समितियों और भाजपा विधानमंडल दल के उपनेता के रूप में भी काम किया। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में उन्हें सिंचाई मंत्री बनाया गया। हालांकि करीब ढाई साल बाद उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया। वर्ष 2022 में पांचवीं बार विधायक चुने जाने पर वह फिर योगी मंत्रिमंडल में शामिल हुए। पशुधन एवं दुग्ध विकास, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले धर्मपाल के लिए राज्यसभा की उम्मीदवारी अब नया राजनीतिक पड़ाव है। बता दें कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। इनमें श्रुति और बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, दो महिला चेहरे हैं। राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं। प्रकाश पाल का कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के संगठन में लंबा अनुभव रहा है। आगरा के पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह चौहान ने भी जमीनी कार्यकर्ता से प्रदेश संगठन तक विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं। इनके साथ विद्यासागर सोनकर और गोपी कृष्ण पांडेय को भी पार्टी ने उच्च सदन के चुनाव में उतारा है।
2027 के विधानसभा चुनावों में होंगई कई चेहरे
बरेली भाजपा में विधानसभा चुनावों से पहले दो नेताओं को राज्यसभा के लिये उम्मीदवार बनाये जाने से कई नये समीकरण तैयार हो रहे हैं। आंवला विधानसभा के लिये अब पार्टी किसी नये चेहरे पर भरोसा जतायेगी, इसके अलावा दूसरे दलों से विधायक और प्रत्याशी रहे कई नेता भी अब टिकट की लाइन में हैं। श्रुति गंगवार भी जोरों से विधानसभा की तैयारी कर रहीं थीं। उनके राज्यसभा उम्मीदवार बनने से अब बहेड़ी और नवाबगंज से उनके चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम लग गया है। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी ने बताया कि कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी संगठन पूरी तैयारी के साथ चुनाव लड़ायेगा। पार्टी हाईकमान ने बरेली के दो नेताओं पर भरोसा जताया है। इससे प्रदेश के साथ ही राष्ट्रीय फलक पर भी बरेली का मान बढ़ेगा।