बरेली। किला क्षेत्र के मोहल्ला फूटा दरवाजा में चल रहे उर्स-ए-गौसिया के तीसरे दिन अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। गौस-ए-पाक की याद में तिलावत और तकरीर का सिलसिला चला। मस्जिद नोमहला और झंडे शरीफ पर गिलाफ-ए-गौसिया की जियारत कराई गई। देर रात 2:38 बजे हजरत गौस-ए-आजम के 886वें कुल शरीफ की रस्म अदा हुई। इस दौरान मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।
फज्र की नमाज के बाद तिलावत से आगाज
उर्स के तीसरे दिन का आगाज फज्र की नमाज के बाद तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद दिनभर हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी गौस-ए-पाक के अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। झंडा शरीफ कमेटी के सचिव फराज मियां ने बताया कि जोहर की नमाज के बाद मोहम्मद आसिम हुसैन कादरी ने मस्जिद नोमहला शरीफ में नमाजियों को गिलाफ-ए-गौसिया की जियारत कराई। दरगाह नासिर मियां रहमतुल्लाह अलैह पर भी अकीदतमंदों ने गौस-ए-पाक के मजार से आई मुकद्दस चादर का दीदार किया। इसके बाद झंडे शरीफ पर गिलाफ-ए-गौसिया की जियारत हुई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर दुआ मांगी।
दूल्हे के लिबास में सलामी देने पहुंचे बच्चे
असर और मगरिब के बीच मन्नत पूरी होने पर कई बच्चे दूल्हे के लिबास में सलामी देने पहुंचे। इस दौरान उर्स स्थल पर अकीदत का माहौल बना रहा। इशा की नमाज के बाद हुई तकरीरी महफिल में शहर इमाम खुर्शीद आलम ने गौस-ए-आजम की जिंदगी और उनकी तालीमात पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि गौस-ए-आजम की जिंदगी शरीअत और सुन्नत की पाबंदी का उदाहरण रही। कारी एजाज नूरी ने कहा कि उनकी तालीमात इंसान को सच बोलने, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करने तथा लालच से दूर रहने का संदेश देती हैं। अन्य उलमा ने भी गौस-ए-पाक की जिंदगी और उनकी तालीमात के बारे में बताया।
रात 2:38 बजे अदा हुई कुल शरीफ की रस्म
देर रात 2:38 बजे हजरत गौस-ए-आजम के 886वें कुल शरीफ की रस्म अकीदत के साथ अदा की गई। खुसूसी दुआ में भारत में अमन, मोहब्बत, भाईचारा और तरक्की की कामना की गई। इसके साथ ही दुनिया भर के जरूरतमंद और परेशान लोगों की मदद, बीमारों की सेहत और समाज में खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई। बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक एवं समाजसेवी पम्मी खां वारसी ने गौस-ए-आजम की शान में कलाम पेश किया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए अकीदतमंद
कार्यक्रम में हाजी शावेज हाशमी, पम्मी खां वारसी, आसिम हुसैन कादरी, सोहेल हाशमी, यावर अली खां बिट्टू, सोहेल शम्सी, सैयद पप्पू जमील, अशरफ शम्सी, नावेद हाशमी, फरमान खान, अहमद खान टीटू, नादिर खान, मुन्ना अंसारी, शहंशाह मियां, ताहिर खान, फैजी खान, सैयद काजिम अली, मुजाहिद इस्लाम, अरबाज खान, मुजम्मिल खान, इस्तेखार शम्सी, सलीम बेग, आसिफ शम्सी, फुरकान खान, चांद मियां, संजय सैनी, जावेद, जाहिद शम्सी, नदीम शम्सी, इमरान अंसारी, अकलीम बेग अंजुम समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।