बरेली। लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे पानी ने बरेली की नदियों का मिजाज बदल दिया है। अरिल नदी उफान पर है और हरुनगला-पथरा के बीच पुल के ऊपर से पानी बहने लगा है। तेज धार ने आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ा दिया है। कुछ दिन पहले इसी नदी के उफनते पानी में पुल पार करते समय तीन बाइक सवार युवक बह गए थे, जिनके बाद में शव बरामद हुए थे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाते हुए जिले में 48 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं।
पुल के ऊपर पानी, रास्ता पार करना जानलेवा
हरुनगला और पथरा के बीच अरिल नदी का बहाव बेहद तेज हो गया है। नदी का पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। ऐसे में पुल और जलभराव वाले रास्तों से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने की कोशिश न करने की सलाह दी है।
रामगंगा भी चढ़ी, चौबारी में 160.830 मीटर पहुंचा जलस्तर
अरिल के साथ रामगंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार चौबारी में बुधवार सुबह आठ बजे रामगंगा का जलस्तर 160.830 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 162.070 मीटर और खतरे का निशान 163.070 मीटर है। फिलहाल रामगंगा खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है।
वर्ष 2010 में रामगंगा का जलस्तर 162.820 मीटर तक पहुंचा था। दैवीय आपदा विशेषज्ञ शुभ अक्षित सिंह के मुताबिक चौबारी और बरेली शहर में बारिश दर्ज नहीं होने के बावजूद नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
48 बाढ़ चौकियों से संवेदनशील इलाकों की निगरानी
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिले में 48 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इनके जरिए नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन के मुताबिक फिलहाल जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं। राजस्व और संबंधित विभागों की टीमों को नदियों के जलस्तर, कटान और तटबंधों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
अरिल पहले ही ले चुकी तीन युवकों की जान
अरिल नदी का उफान कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा हाल में हुए हादसे से लगाया जा सकता है। आंवला क्षेत्र में रपटा पुल के ऊपर पानी बहने के बावजूद तीन बाइक सवार युवकों ने उसे पार करने की कोशिश की थी। तेज धार में बाइक अनियंत्रित हुई और तीनों युवक नदी में बह गए। बाद में तीनों के शव बरामद किए गए थे। हादसे के बाद प्रशासन लगातार लोगों से उफनती नदी और डूबे पुलों से दूर रहने की अपील कर रहा है।
कहीं मंदिर समाया, कहीं करोड़ों की पानी की टंकी
बरेली में बढ़ता जलस्तर ही नहीं, नदियों का कटान भी बड़ी चुनौती बन गया है। मीरगंज के कपूरपुर में रामगंगा के कटान की चपेट में आकर प्राचीन मंदिर नदी में समा गया। वहीं शेरगढ़ क्षेत्र के बैरमनगर में किच्छा नदी के कटान से जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही करोड़ों रुपये की पानी की टंकी भी नदी में समा चुकी है। कई स्थानों पर कृषि भूमि भी लगातार कटान की भेंट चढ़ रही है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से सतर्क रहने, बच्चों और मवेशियों को तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रखने और पुल के ऊपर पानी बहने की स्थिति में किसी भी कीमत पर उसे पार न करने की अपील की है।