4.5 साल की चिकित्सा शिक्षा के बाद अस्पतालों में दे रहे सेवाएं, कम वजीफे से आर्थिक संकट का दावा; डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री तक मांग पहुंचाने की गुहार
बरेली। उत्तर प्रदेश के सरकारी आयुष कॉलेजों में प्रशिक्षणरत आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के विभिन्न आयुष कॉलेजों के इंटर्न एवं छात्रों ने वर्तमान में मिल रहे करीब ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर कम से कम ₹25,000 करने की मांग उठाई है। इंटर्न ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी मांग को प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने तथा इस मामले में सकारात्मक पहल कराने की अपील की है।
4.5 साल की पढ़ाई के बाद अस्पताल में जिम्मेदारियां, लेकिन वजीफा महज ₹7,500
आयुष इंटर्न का कहना है कि साढ़े चार वर्ष की कठिन चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप उनके प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान वे सरकारी अस्पतालों में वार्ड ड्यूटी, मरीजों की निगरानी, चिकित्सीय प्रक्रियाओं में सहयोग और अस्पताल की दैनिक चिकित्सा सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार इंटर्न को निर्धारित कार्यालय समय से अधिक समय तक अस्पताल में सेवाएं देनी पड़ती हैं। इंटर्न का तर्क है कि जब उनसे चिकित्सा संस्थानों में नियमित रूप से मरीजों की देखभाल और चिकित्सीय कार्यों में योगदान लिया जा रहा है, तो उनके स्टाइपेंड का मौजूदा स्तर उनकी जिम्मेदारियों और कार्यभार के अनुरूप नहीं है।
₹250 प्रतिदिन में आवास, भोजन और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल
इंटर्न के मुताबिक ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड का अर्थ लगभग ₹250 प्रतिदिन है। वर्तमान महंगाई में इस राशि से आवास, भोजन, आने-जाने का खर्च, अध्ययन सामग्री, इंटरनेट, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अन्य जरूरी खर्चों का वहन करना बेहद कठिन हो गया है। इंटर्न का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के साढ़े चार वर्ष पूरे करने और अस्पताल में मरीजों की सेवा करने के बावजूद उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी माता-पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे न केवल आर्थिक दबाव बढ़ता है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की उनकी उम्मीदों को भी झटका लगता है।
दूसरे राज्यों में ज्यादा स्टाइपेंड, यूपी में बढ़ोतरी की मांग
आयुष इंटर्न ने दावा किया है कि देश के कई राज्यों में आयुष इंटर्न को उत्तर प्रदेश की तुलना में कहीं अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में करीब ₹29,733, बिहार में ₹27,000, कर्नाटक में ₹25,000, केरल में ₹23,000 तक तथा छत्तीसगढ़ में लगभग ₹12,600 से ₹15,900 तक स्टाइपेंड दिए जाने का उल्लेख किया गया है। इंटर्न का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी आयुष चिकित्सा व्यवस्था के भविष्य के चिकित्सकों को उनकी जिम्मेदारियों और बढ़ती जीवन-यापन लागत के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
15 साल से लगभग एक ही स्तर पर स्टाइपेंड रहने का दावा
ज्ञापन में इंटर्न ने दावा किया है कि आयुष इंटर्न का मौजूदा ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड लंबे समय से लगभग इसी स्तर पर बना हुआ है। इस दौरान महंगाई, किराया, भोजन, परिवहन, शिक्षा और दैनिक जरूरतों की लागत में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में वर्षों से स्टाइपेंड में अपेक्षित संशोधन न होने को इंटर्न ने वर्तमान परिस्थितियों से असंगत बताया है। इंटर्न ने सरकार से महंगाई और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्टाइपेंड का पुनरीक्षण करने की मांग की है।
MBBS-बीडीएस इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड देने की मांग
इंटर्न ने अपने ज्ञापन में MBBS और BDS इंटर्न के स्टाइपेंड में हुई बढ़ोतरी का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि यदि अन्य चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न के स्टाइपेंड में वृद्धि की गई है तो आयुष इंटर्न को भी समान आधार पर आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। उनकी मांग है कि आयुष इंटर्न के लिए भी ₹25,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड निर्धारित किया जाए, ताकि चिकित्सा प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और वे मरीजों की सेवा तथा अपने आगामी चिकित्सा करियर की तैयारी पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकें।
NCISM के नियमों का हवाला, समानता के सिद्धांत की मांग
इंटर्न ने अपनी मांग के समर्थन में NCISM की 16 फरवरी 2022 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया है। ज्ञापन में संबंधित विनियम के उस प्रावधान का हवाला दिया गया है, जिसमें वेतन/स्टाइपेंड को अन्य चिकित्सा प्रणालियों के अनुरूप रखने और चिकित्सा प्रणालियों के बीच विसंगति न होने के सिद्धांत की बात कही गई है। इंटर्न का कहना है कि यदि नियामकीय प्रावधानों में अन्य चिकित्सा प्रणालियों के साथ समानता का सिद्धांत निर्धारित है, तो आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड के मामले में भी इसी भावना के अनुरूप निर्णय होना चाहिए।
आयुष सेवाओं के विस्तार के बीच इंटर्न के स्टाइपेंड पर भी ध्यान देने की अपील
ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयुष क्लीनिक, आयुष ओपीडी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन सेवाओं में प्रशिक्षित आयुष इंटर्न भी मरीजों की सेवा और चिकित्सीय प्रशिक्षण के दौरान अपनी भूमिका निभाते हैं। इंटर्न का सवाल है कि जब आयुष चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने और उसका विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है, तो उसके महत्वपूर्ण मानव संसाधन माने जाने वाले इंटर्न के स्टाइपेंड को भी समयानुकूल और सम्मानजनक क्यों न बनाया जाए।
‘दूसरी चिकित्सा पद्धति के खिलाफ नहीं, बराबरी की मांग’
इंटर्न ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग किसी अन्य चिकित्सा पद्धति या उसके छात्रों के अधिकारों को कम करने की नहीं है। वे केवल आयुष इंटर्न के साथ भी समान एवं न्यायसंगत व्यवहार किए जाने की मांग कर रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत अन्य चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न के स्टाइपेंड में वृद्धि की जाती है तो उसी अनुरूप आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
डीएम से मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों तक आवाज पहुंचाने की अपील
आयुष इंटर्न और छात्रों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि उनकी मांग को उचित माध्यम से संबंधित उच्च अधिकारियों, राज्य सरकार और आयुष मंत्रालय तक पहुंचाया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी। इंटर्न का कहना है कि ₹25 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि चिकित्सा प्रशिक्षण के दौरान उनके श्रम, जिम्मेदारी और योगदान को सम्मान देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।