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बरेली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के निर्माण खंड भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर वेतन व एरियर के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये से अधिक निकालने का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। जिन 22 कर्मचारियों के नाम पर रकम निकाली गई, उनमें से 16 अब भी विभाग के विभिन्न खंडों में कार्यरत बताए गए हैं।

निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पाल, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन अधीक्षण सहायक तिरेश आनंद, तत्कालीन अधिष्ठान सहायक अभिषेक सक्सेना, मार्च 2020 से जनवरी 2021 तक तैनात रहे तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार और वर्तमान अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तहरीर दी गई है। इसमें फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए वेतन और एरियर का भुगतान निकालने का आरोप लगाया गया है।

दो प्रकरणों में सामने आई गड़बड़ी

विभागीय पड़ताल में भुगतान से जुड़े दो प्रकरण सामने आए हैं। एक प्रकरण में 11 कर्मचारियों के नाम पर निकाली गई रकम की जांच में पाया गया कि केवल एक अवर अभियंता को 94,589 रुपये का वास्तविक भुगतान हुआ था। शेष दस कर्मचारियों को संबंधित भुगतान नहीं मिला। कर्मचारियों ने भी ऐसे वेतन या एरियर का भुगतान मिलने से इनकार किया है। दूसरे प्रकरण में 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर 61,21,186 रुपये का भुगतान दर्शाया गया। जांच में तत्कालीन अवर अभियंता अतर अली के 16,256 रुपये के भुगतान को छोड़कर शेष 61,04,930 रुपये कथित जालसाजी से निकाले जाने की बात सामने आई। संबंधित बिल पर पांच हस्ताक्षरों में से चार हूबहू नकल कर बनाए गए और एक अस्पष्ट बताया गया है। इस प्रकरण से जुड़े नौ कर्मचारी अब भी विभाग में कार्यरत हैं।

लखनऊ मुख्यालय तक पहुंचा मामला

कुल 1,28,62,522 रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग के बरेली से लखनऊ मुख्यालय तक जांच शुरू हो गई है। जांच की जिम्मेदारी सहायक अभियंता (मुख्यालय) रवेंद्र सिंह को सौंपी गई है। प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष ने भी रिपोर्ट मांगी है। संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता सीपी गुप्ता ने बताया कि विभागीय जांच जारी है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कर्मचारियों से एफिडेविट भी लिए जाएंगे।

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