बहेड़ी। केसर चीनी मिल के किसानों का बकाया भुगतान एक बार फिर अटक गया है। अवध ग्रुप की ओर से दिया गया 55 करोड़ रुपये का चेक बाउंस हो गया। अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन आदि के भुगतान के लिए दिया गया चेक भी बैंक से लौट आया। इससे नाराज किसानों ने बुधवार को मिल परिसर में प्रदर्शन किया। अब मिल की कुर्क संपत्ति की नीलामी के आसार फिर बनने लगे हैं।
केसर इंटरप्राइजेज चीनी मिल पर किसानों का करीब 165 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। दो साल से भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों को मिल की बिक्री के बाद राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। मिल प्रबंधन ने कुछ समय पहले 431 करोड़ रुपये में अवध ग्रुप को मिल बेची थी। अवध ग्रुप ने नौ महीने में पूरा बकाया चुकाने और मिल को समय से चालू करने का आश्वासन दिया था।
सोमवार को बैंक में लगाए गए थे दोनों चेक
कुछ दिन पहले अवध फूड्स ग्रुप के चेयरमैन ने जिलाधिकारी के सामने मिल प्रबंधन को किसानों के भुगतान के लिए 55 करोड़ रुपये का चेक दिया था। इसे बैंक में लगाने के लिए पांच अक्टूबर तक का समय मांगा गया था। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए भी चेक दिया गया था। सोमवार को दोनों चेक बैंक में लगाए गए, लेकिन दोनों बाउंस हो गए। इसकी जानकारी मिलने पर किसानों और कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई। प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई।
36 करोड़ रुपये आंकी गई थी कुर्क जमीन की कीमत
मिल की कुर्क जमीन की नीलामी के लिए पिछले दिनों मूल्यांकन समिति ने नए सर्किल रेट के आधार पर उसकी कीमत 36 करोड़ रुपये आंकी थी। इस बीच अवध ग्रुप के चेयरमैन ने चेक सौंपकर नीलामी स्थगित करने का आग्रह किया था। पेराई सत्र शुरू होने से पहले शत-प्रतिशत भुगतान का भरोसा मिलने पर नीलामी रोक दी गई थी। चेक बाउंस होने के बाद अब नीलामी की संभावना फिर बन गई है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह के मुताबिक, चेक बाउंस होने की मौखिक जानकारी मिली है। हालांकि तहसील से अभी लिखित रिपोर्ट नहीं आई है। गुरुवार को मूल्यांकन समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें निर्णय लिया जाएगा।
किसानों ने उठाई मिल मालिक का पासपोर्ट जब्त करने की मांग
बुधवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मिल प्रबंधन से मुलाकात की। किसानों ने पूछा कि यदि मिल का सौदा रद्द हो गया तो उनके बकाये का भुगतान कैसे होगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसानों ने प्रशासन को पत्र भेजकर भुगतान होने तक मिल के मौजूदा मालिक का पासपोर्ट जब्त करने की मांग की। किसानों ने आशंका जताई कि मिल मालिक विदेश जा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति बनी तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।