रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति समझौते की तैयारी के बीच पर्दे के पीछे बड़ा खेल रहे जेलेंस्की, ट्रंप के धोखे के कारण टूटा भरोसा
Russia Ukraine War News Update: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता के बीच राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपनी तैयारियों को और धार देने में जुट गए हैं. एक तरह से अमेरिका पर से उनका भरोसा टूट गया है. यूक्रेन फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल जैसी घरेलू हथियार फैक्ट्रियां भी बना रहा है. इससे लगता है कि यूक्रेंन अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहता है.
रूस यूक्रेन जंग को खत्म कराने को लेकर चल रही शांति वार्ता के बीच जेलेंस्की ने देसी हथियार बनाने का काम शुरू कर दिया है.
Russia Ukraine War News Update: करीब चार साल से चल रहे रूस-यूकेन युद्ध के खत्म होने की संभावना के बीच राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की भी बड़ा खेल कर रहे हैं. जेलेंस्की ने कहा है कि जंग खत्म कराने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ चल रही वार्ता में प्रस्तावित समझौता कुछ दिनों में अंतिम रूप ले सकता है. इसके बाद अमेरिकी दूत इसे रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन को सौंपेंगे और अगले वीकेंड में अमेरिका में आगे की बैठक हो सकती है. सोमवार को बर्लिन में हुई वार्ता के बाद जेलेंस्की ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका के साथ शांति योजना का मसौदा परफेक्ट नहीं है, लेकिन बहुत व्यावहारिक है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ प्रमुख मुद्दे- विशेष रूप से रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों का भविष्य अभी अनसुलझे हैं.
इस बीच अमेरिका नेतृत्व वाली शांति प्रयासों में तेजी आ रही है, लेकिन अब ध्यान मॉस्को की ओर है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वाशिंगटन, कीव और पश्चिमी यूरोप के अधिकारियों द्वारा तैयार प्रस्तावों पर आपत्ति जता सकते हैं, खासकर यूक्रेन के लिए युद्ध के बाद की सुरक्षा गारंटी पर. जेलेंस्की ने कहा कि बर्लिन वार्ता के बाद हम मजबूत सुरक्षा गारंटी पर बहुत करीब हैं. नाटो देश के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि सुरक्षा प्रस्ताव पश्चिमी सहायता पर आधारित होगा, जो यूक्रेनी सेना को मजबूत बनाए रखेगा.
सीक्रेट हथियार फैक्ट्री चला रहा यूक्रेन
इस बीच बीबीसी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन अब अपने दम पर अपनी सुरक्षा की योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए उसने काम भी शुरू कर दिया है. वह हथियारों को लेकर पूरी तरह से पश्चिम खासकर अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता है. वह अपने दम पर हथियार बनाने की फैक्ट्रियां लगा रहा है. ताकि वह रूसी खतरों से अपने दम पर निपट सके. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक यूक्रेन सोवियत संघ के वक्त के हथियारों पर निर्भर था, लेकिन अब उसको आधुनिक हथियारों की जरूरत महसूस हुई है. इस बीच उसे पश्चिम देशों से अपेक्षित सहायता भी नहीं मिली है. इसी कारण वह अपने हथियार फैक्ट्रियां लगा रहा है.
एक ऐसी ही फैक्ट्री में बीबीसी के पत्रकार पहुंचे. वह फैक्ट्री में फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल का निर्माण हो रहा था. पत्रकारों को इस फैक्ट्री की किसी तस्वीर या वहां काम करने वाले लोगों के चेहरे देखने की मनाही थी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के बीच भी यूक्रेन अपना हथियार उद्योग मजबूत कर रहा है. राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार अब देश अपनी जरूरत के 50 फीसदी से अधिक हथियार स्वयं उत्पादित करता है. लंबी दूरी के लगभग सभी हथियार अब घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं. युद्ध की शुरुआत में यूक्रेन सोवियत युग के पुराने हथियारों पर निर्भर था, लेकिन पश्चिमी सहायता से आधुनिकीकरण के बाद अब वह ड्रोन और रोबोट जैसे मानव रहित सिस्टम में लीडर बन गया है. अब घरेलू क्रूज मिसाइलें इस क्षमता को और मजबूत कर रही हैं. फायर पॉइंट कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी इरिना तेरेह ने बताया कि फ्लेमिंगो मिसाइल अब काली रंग की है, शुरुआती प्रोटोटाइप गुलाबी थे. उनका मजाकिया अंदाज में कहना था कि यह मिसाइल रूसी तेल को खा जाती है. यह मिसाइल द्वितीय विश्व युद्ध की जर्मन V1 रॉकेट से मिलती-जुलती है. इसकी रेंज 3000 किलोमीटर बताई जाती है, जो अमेरिकी टॉमाहॉक मिसाइल जैसी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को टॉमाहॉक देने से इनकार कर दिया था. फ्लेमिंगो पहले ही युद्ध में इस्तेमाल हो चुकी है, हालांकि कंपनी ने विशिष्ट लक्ष्यों की पुष्टि नहीं की. यूक्रेन के लिए गहरे हमले महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह रूस के युद्ध अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहा है. यूक्रेन के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल ओलेक्सांडर सिरस्की के अनुसार, लंबी दूरी के हमलों से रूस की अर्थव्यवस्था को इस साल 21.5 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है.