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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सामने आया एक मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा अलार्म बन गया है। मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव से पकड़े गए संदिग्ध सावेज उर्फ जिहादी के मोबाइल फोन से ऐसे डिजिटल सुराग मिले हैं, जिन्होंने एक संभावित आतंकी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। जांच में सामने आया कि वह Signal जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाकर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों के संपर्क में था। मोबाइल में मिली चैट, वीडियो और सोशल मीडिया कनेक्शन ने एजेंसियों को यह संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर कट्टरपंथी नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जा रही थी।

गाजियाबाद से खुली डिजिटल आतंकी साजिश की परत

गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव से पकड़े गए संदिग्ध सावेज की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को कई चौंकाने वाले डिजिटल सबूत मिले हैं। पुलिस के अनुसार सावेज लंबे समय से इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध लोगों से संपर्क में था। उसके मोबाइल फोन की जांच में कई ऐसे वीडियो, फोटो और चैट सामने आए हैं जो प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नेटवर्क फैलाने की आशंका के चलते एजेंसियां अब इस पूरे मामले को व्यापक स्तर पर खंगाल रही हैं। सावेज के मोबाइल डेटा से मिले सुरागों ने सुरक्षा एजेंसियों को यह संकेत दिया है कि इंटरनेट और एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स का इस्तेमाल कर एक संगठित नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके संपर्क किन-किन लोगों तक फैले हुए हैं।

Signal ऐप के ग्रुप चैट से मिला साजिश का सुराग

जांच में सामने आया कि सावेज Signal नामक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करता था। यह ऐप सुरक्षित और गोपनीय चैट के लिए जाना जाता है, जिससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि संदिग्ध गतिविधियों को छिपाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया होगा। पुलिस को उसके मोबाइल में Signal ऐप के दो ग्रुप चैट मिले हैं। इनमें से एक चैट में नौ फरवरी को सावेज ने एक मैसेज रिक्वेस्ट स्वीकार की थी, जिसके बाद उसकी बातचीत आफताब आलम नाम के व्यक्ति से शुरू हुई। एजेंसियों को शक है कि आफताब भी उसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जिससे सावेज जुड़ा हुआ था। इन चैट्स में कई ऐसे संदेश मिले हैं जिनमें आपसी संवाद के जरिए किसी गतिविधि की योजना बनाने के संकेत मिलते हैं। हालांकि पुलिस अभी इन संदेशों के वास्तविक अर्थ और संदर्भ की गहन जांच कर रही है। डिजिटल फोरेंसिक टीम चैट के प्रत्येक शब्द और समय को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन बातचीतों के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।

इंस्टाग्राम कनेक्शन और संदिग्ध डिजिटल नेटवर्क

Signal चैट के अलावा जांच में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से भी जुड़े कुछ अहम सुराग सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार आफताब आलम ने चैट के दौरान सावेज को “हमजा” नाम की एक इंस्टाग्राम आईडी शेयर की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह आईडी भी कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े किसी व्यक्ति की हो सकती है। हालांकि अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और एजेंसियां इस डिजिटल लिंक की गहराई से जांच कर रही हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क बनाने का यह तरीका जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान और एन्क्रिप्टेड चैट के कारण ऐसे नेटवर्क का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण एजेंसियां अब साइबर जांच को और तेज कर रही हैं ताकि इन डिजिटल कनेक्शनों की पूरी श्रृंखला सामने लाई जा सके।

‘तलवार ले ली… चलो चित्तौड़ा’ चैट से बढ़ी जांच की गंभीरता

जांच के दौरान सावेज और इकराम नाम के व्यक्ति के बीच हुई बातचीत ने एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से खींचा है। चैट में कुछ ऐसे संदेश सामने आए हैं जिनमें कट्टरपंथी विचारधारा और संभावित योजना के संकेत मिलते हैं। एक चैट में इकराम ने ‘तलवार ले ली’ लिखा था, जिस पर सावेज ने ‘हां ले ली’ जवाब दिया। इसके बाद ‘चलो चित्तौड़ा’ जैसे संदेश भी सामने आए हैं। इन संदेशों का वास्तविक अर्थ क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जांच एजेंसियां इन्हें गंभीरता से ले रही हैं। पुलिस का कहना है कि इन शब्दों का इस्तेमाल किसी कोड भाषा के रूप में भी किया गया हो सकता है। इसलिए डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियां इन संदेशों के संदर्भ और संभावित उद्देश्य की गहराई से जांच कर रही हैं।

कट्टरपंथी वीडियो और छह संदिग्धों की गिरफ्तारी

पूछताछ में सावेज ने बताया कि वह लंबे समय से मसूद अजहर के वीडियो देखता था और उनसे प्रभावित हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख माना जाता है और उसके वीडियो कई बार कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि सावेज खुद भी ऐसे वीडियो दूसरों को देखने के लिए प्रेरित करता था। उसके मोबाइल में कथित ट्रेनिंग सेंटर से जुड़े वीडियो और फोटो भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस ने नाहल गांव से कुल छह संदिग्धों को हिरासत में लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ये लोग गांव में ज्यादा घुलते-मिलते नहीं थे और अक्सर अपने अलग समूह में रहते थे। फिलहाल पुलिस सभी संदिग्धों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलने वाले ऐसे नेटवर्क भविष्य में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसलिए मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस आरोपियों को पीसीआर पर लेकर आगे पूछताछ की तैयारी कर रही है।

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