बरेली में स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है, जहां गलत इलाज से एक युवक की हालत गंभीर होने के बाद परिजन उसे ऑटो में लिटाकर सीएमओ कार्यालय पहुंच गए। आरोप है कि अवैध रूप से क्लीनिक चला रहे झोलाछाप ने पेट दर्द के इलाज में ऑपरेशन कर दिया, जिससे मरीज की जान खतरे में पड़ गई। क्लीनिक सील होने के बावजूद न तो आरोपी पर मुकदमा दर्ज हुआ और न ही पुलिस कार्रवाई हुई, जिससे विभागीय भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिला अस्पताल में हंगामा, झोलाछाप इलाज से बिगड़ी हालत
उत्तर प्रदेश के Bareilly में बुधवार को जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय उस वक्त हंगामे का केंद्र बन गया, जब गलत ऑपरेशन से पीड़ित एक युवक को उसके परिजन ऑटो में लिटाकर कार्यालय परिसर तक ले आए। मामला सिर्फ एक मरीज का नहीं रहा, बल्कि इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की सच्चाई उजागर हो गई।
ऑटो में लेटा रहा मरीज, उल्टियों से बिगड़ती हालत
बारादरी थाना क्षेत्र के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल अपने बेटे अजय को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। अजय ऑटो में लेटा रहा, उसकी हालत नाजुक थी और लगातार उल्टियां हो रही थीं। परिजनों का कहना है कि युवक न तो ठीक से चल पा रहा है और न ही बैठ पा रहा है। उनकी नाराजगी इस बात को लेकर थी कि शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पेट दर्द के इलाज में कर दिया ऑपरेशन
परिजनों के अनुसार, करीब एक महीने पहले अजय को पेट दर्द हुआ था। वह जांच रिपोर्ट लेकर पीलीभीत बाईपास स्थित प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक पहुंचा। वहां जयवीर नामक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताते हुए पेशाब की जगह में पानी भरने की बात कही और ऑपरेशन कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद 25 दिनों तक युवक को बार-बार क्लीनिक बुलाया गया। पट्टी की जाती रही, तीन बार टांके लगाए गए, लेकिन रक्तस्राव नहीं रुका। समय के साथ हालत और बिगड़ती चली गई। जब दर्द और कमजोरी असहनीय हो गई, तब परिवार को मामले की गंभीरता समझ आई।
क्लीनिक सील, लेकिन मुकदमा क्यों नहीं?
मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची तो नोडल अधिकारी ने क्लीनिक को सील करा दिया। हालांकि, यहीं से सवाल खड़े हो जाते हैं। यदि क्लीनिक अवैध था और इलाज गलत तरीके से किया गया, तो आरोपी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई?
परिजनों का आरोप है कि न तो थाने को कोई रिपोर्ट भेजी गई और न ही पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा गया। इसी वजह से बुधवार को वे सीधे सीएमओ कार्यालय पहुंचे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।
अधिकारियों पर साठगांठ का आरोप
परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झोलाछाप डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की शह पर फल-फूल रहे हैं। शिकायत के बावजूद केवल क्लीनिक सील करना खानापूरी है, जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहा है। परिजनों का दावा है कि बुधवार को आरोपी जयवीर भी नोडल अधिकारी से मिलने कार्यालय पहुंचा था, जिससे साठगांठ की आशंका और गहरी हो गई।
आरोपी ने आरोप किए खारिज
वहीं आरोपी जयवीर ने खुद पर लगे सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसने कोई ऑपरेशन नहीं किया और उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। उसका दावा है कि वह लिखित बयान देने नोडल अधिकारी के पास आया था।
धरने की चेतावनी, पुलिस ने कराया शांत
परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो वे सीएमओ कार्यालय में धरने पर बैठ जाएंगे। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया।
सीएमओ और नोडल अधिकारी की चुप्पी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अधिकारियों की चुप्पी है। सीएमओ विश्राम सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। नोडल अधिकारी अमित ने भी इस विषय पर कोई स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया।
झोलाछापों पर कब लगेगी लगाम?
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या कोई नई नहीं है। समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, क्लीनिक सील होते हैं, लेकिन आपराधिक मुकदमे दर्ज न होने से ऐसे लोग दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। इस मामले ने एक बार फिर दिखा दिया कि कागजी कार्रवाई और वास्तविक सख्ती के बीच बड़ा अंतर है।