गाजियाबाद नगर निगम में एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। मेयर सुनीता दयाल के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग कर दी गई और किराए में भारी छूट दिखाकर सरकारी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। जब इस पूरे मामले की जांच हुई तो कई दस्तावेजों पर मेयर के नकली सिग्नेचर मिलने की पुष्टि हुई। मामला सामने आते ही नगर निगम में हड़कंप मच गया और दो कर्मचारियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।
फर्जी सिग्नेचर से बुकिंग का खुलासा, नगर निगम में मचा हड़कंप
गाजियाबाद नगर निगम में सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में पता चला कि मेयर सुनीता दयाल के नाम पर नकली हस्ताक्षर कर कई बुकिंग की गईं और किराए में छूट दिखाकर लोगों को कम दर पर सामुदायिक केंद्र उपलब्ध करा दिए गए। यह मामला तब उजागर हुआ जब कुछ दस्तावेजों की जांच में हस्ताक्षरों को लेकर संदेह पैदा हुआ। बाद में पुष्टि हुई कि दस्तावेजों पर किए गए सिग्नेचर मेयर के असली हस्ताक्षर नहीं हैं। जैसे ही यह जानकारी नगर निगम प्रशासन तक पहुंची, पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच कराई गई और शुरुआती जांच में ही कई अनियमितताएं सामने आ गईं। इस खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी।
छूट की व्यवस्था का उठाया गया फायदा
नगर निगम में सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग के लिए एक निर्धारित शुल्क तय किया गया है। आम तौर पर इन केंद्रों की बुकिंग लगभग 11 हजार रुपये और जीएसटी के साथ की जाती है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में मेयर को यह अधिकार होता है कि वे किसी व्यक्ति को किराए में अधिकतम छह हजार रुपये तक की छूट दे सकती हैं। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए नगर निगम के दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर मेयर के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर दिए और दस्तावेजों में किराए में छूट दिखाकर बुकिंग कर दी। आरोप है कि इस तरह कई लोगों को कम दर पर सामुदायिक केंद्र उपलब्ध करा दिए गए। इस प्रक्रिया में सरकारी नियमों को दरकिनार किया गया और मेयर की अनुमति का दिखावा कर पूरे सिस्टम का दुरुपयोग किया गया। जब यह बात सामने आई तो प्रशासन ने इसे गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता माना।
दो कर्मचारियों पर गिरी गाज, तत्काल निलंबन
जांच के बाद नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में दो कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। रमेश चंद्र और प्रेम पाल नाम के कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। बताया गया कि रमेश चंद्र सामुदायिक केंद्रों से जुड़े कार्यों को संभालते थे, जबकि प्रेम पाल मेयर कार्यालय में तैनात थे। आरोप है कि दोनों ने मिलकर मेयर के नकली हस्ताक्षर कर बुकिंग से जुड़े दस्तावेजों में किराए में छूट दिखा दी। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि दोनों कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर कई फाइलों में मेयर के सिग्नेचर की नकल की। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि गंभीर अनुशासनहीनता और संभावित भ्रष्टाचार का मामला है। इसलिए दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पांच मामलों में मिले नकली हस्ताक्षर
मेयर कार्यालय की ओर से जब फाइलों की जांच की गई तो कई दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों को लेकर संदेह पैदा हुआ। मेयर के पीए ने बताया कि कम से कम पांच ऐसे आवेदन सामने आए हैं जिनमें किए गए सिग्नेचर मेयर सुनीता दयाल के नहीं हैं। इसके बाद पूरी फाइलों की जांच कराई गई और पुष्टि हुई कि उन दस्तावेजों में नकली हस्ताक्षर किए गए थे। यह खुलासा होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव ने बताया कि फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में और लोग शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं मेयर सुनीता दयाल
गाजियाबाद की मेयर सुनीता दयाल अपने सख्त प्रशासनिक रुख के लिए जानी जाती हैं। पिछले साल भी वह एक विवाद के दौरान चर्चा में आई थीं जब जीटी रोड स्थित शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन के पास ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बनी एक मजार को हटाने को लेकर वह मौके पर पहुंच गई थीं। उस दौरान उन्होंने साफ कहा था कि धार्मिक स्थलों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, लेकिन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना के बाद वह कानून और नियमों के पालन को लेकर और ज्यादा सख्त नजर आई थीं। अब नगर निगम में फर्जी सिग्नेचर का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी दस्तावेजों में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।