ईरान की धरती पर जब आसमान से बम बरस रहे हैं, तब वहां रह रहे भारतीयों ने जो किया, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। तेहरान से लेकर कोम तक सड़कों पर उतरे भारतीयों ने हाथों में तिरंगा लेकर न सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि एक ऐसा संदेश दिया जिसने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी—“डर नहीं, हम साथ हैं।”
जंग के साए में सड़कों पर उतरे भारतीय… कोम बना केंद्र
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान में भारतीय समुदाय का सड़कों पर उतरना एक असाधारण घटना बन गया है। तेहरान से करीब 150 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कोम शहर अचानक वैश्विक सुर्खियों में आ गया, जब यहां सैकड़ों भारतीय पुरुष और महिलाएं एकजुट होकर रैली में शामिल हुए। हाथों में तिरंगा और चेहरे पर दृढ़ता लिए इन लोगों ने जिस तरह सड़कों पर मार्च किया, वह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक और सामाजिक संदेश था। युद्ध के माहौल में जहां आम लोग घरों में सुरक्षित रहने की कोशिश करते हैं, वहां भारतीय समुदाय का इस तरह खुलकर सामने आना साहस और एकजुटता का प्रतीक बन गया।
तिरंगे के साथ गूंजे नारे… ‘हम नहीं डरते’ का संदेश
इस रैली की सबसे खास तस्वीर वह रही, जब सैकड़ों भारतीय तिरंगा लेकर सड़कों पर आगे बढ़े। यह दृश्य न सिर्फ भारत की पहचान का प्रतीक था, बल्कि यह बताता है कि विदेशी धरती पर भी भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने इस प्रदर्शन को और भी प्रभावशाली बना दिया। नारे लगाते हुए लोगों ने साफ कर दिया कि वे किसी भी दबाव या डर के आगे झुकने वाले नहीं हैं। “रहबर के फरमान पर जान भी कुर्बान” जैसे नारों ने इस रैली को और अधिक चर्चित बना दिया और यह संदेश दिया कि भारतीय समुदाय केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बन चुका है।
हमलों के बीच यह प्रदर्शन क्यों बना खास?
यह रैली ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे हालात में किसी भी विदेशी समुदाय का खुले तौर पर सड़कों पर उतरना बेहद जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। रक्षा और रणनीतिक विशेषज्ञ डॉ. सैयद मोहम्मद मुर्तजा द्वारा साझा किए गए वीडियो ने इस घटना को और ज्यादा वायरल कर दिया। इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि वैश्विक संघर्षों के बीच आम नागरिकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों की नजर में बड़ा संकेत… बदल रही है वैश्विक सोच
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रदर्शन केवल एक रैली नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है। भारतीय समुदाय का इस तरह सामने आना यह दिखाता है कि अब प्रवासी भारतीय सिर्फ आर्थिक भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। डॉ. मुर्तजा जैसे विशेषज्ञों ने इस घटना को “असाधारण और साहसिक” बताया है। उनका मानना है कि यह कदम वैश्विक राजनीति में भारत की सॉफ्ट पावर को और मजबूत कर सकता है। यह प्रदर्शन यह भी दर्शाता है कि भारतीय समुदाय संकट के समय भी संगठित और सक्रिय रहता है।
आगे क्या… बढ़ेगा तनाव या बनेगा नया समीकरण?
इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा या फिर यह किसी नए समीकरण की शुरुआत है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर ईरान में भारतीयों का यह प्रदर्शन नई बहस को जन्म दे रहा है। क्या यह भारत के वैश्विक प्रभाव का संकेत है या फिर प्रवासी समुदाय की स्वतंत्र अभिव्यक्ति—इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।