लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी अहम तारीखों को आगे बढ़ाए जाने पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने इस फैसले को लेकर आशंका जताते हुए कहा कि जिस तरह पहले चुनावी नतीजों और मतदान प्रतिशत में देरी से जनता के मन में संदेह पैदा होता था, ठीक उसी तरह अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तारीख बढ़ने से भी सवाल उठ रहे हैं।
मानवीय भूल के बहाने आंकड़े न बढ़ जाएं
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि—कहीं ‘मानवीय भूल’ के बहाने मतदाताओं का आंकड़ा बढ़ न जाए। ध्यान रहे, इस बार PDA प्रहरी चौकन्ने हैं। उनका यह बयान सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा माना जा रहा है। PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को समाजवादी पार्टी का मुख्य आधार माना जाता है, और अखिलेश का यह बयान संकेत देता है कि पार्टी हर स्तर पर निगरानी रखने के मूड में है।
SIR क्या है और क्यों अहम है?
दरअसल, चुनाव आयोग देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया चला रहा है। इसका उद्देश्य—
- फर्जी मतदाताओं को हटाना
- मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना
- नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना
है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की शुचिता के लिए बेहद ज़रूरी मानी जाती है, लेकिन इसकी टाइमिंग और क्रियान्वयन पर अक्सर राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं।
यूपी में बदली गईं SIR से जुड़ी तारीखें
पहले उत्तर प्रदेश में 31 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होनी थी। अब चुनाव आयोग ने इस तारीख को बढ़ाकर 06 जनवरी 2026 कर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक—
- 06 जनवरी 2026: मतदाता सूची का आलेख्य (ड्राफ्ट) प्रकाशन
- 06 जनवरी से 06 फरवरी 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि
- 06 जनवरी से 27 फरवरी 2026: नोटिस चरण, सुनवाई और निस्तारण
- 06 मार्च 2026: मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
अखिलेश यादव को क्यों है आपत्ति?
अखिलेश यादव का कहना है कि चुनावी प्रक्रियाओं में देरी और अस्पष्टता जनता के विश्वास को कमजोर करती है। उन्होंने संकेत दिया कि—
- तारीख बढ़ने से संदेह पैदा होता है
- आंकड़ों में हेरफेर की गुंजाइश बनती है
- “मानवीय भूल” जैसे शब्दों का दुरुपयोग हो सकता है
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनका बयान स्पष्ट करता है कि विपक्ष इस प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखे हुए है।
पहले भी आशंकाएं सही साबित हुई हैं
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का बयान केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि रणनीतिक चेतावनी है। इससे पहले भी—
- मतदान प्रतिशत देर से जारी होने
- रिजल्ट आने में देरी
- आंकड़ों में बदलाव
- जैसे मुद्दों पर विपक्ष सवाल उठाता रहा है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग की ओर से साफ किया गया है कि तारीखों में बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया है और इसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। आयोग के अनुसार, हर दावे और आपत्ति का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची पूरी तरह नियमों के अनुसार प्रकाशित होगी।
राजनीति गरमाने के संकेत
यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। वोटर लिस्ट पर सवाल उठना अक्सर बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बनता रहा है। अखिलेश यादव का “PDA प्रहरी चौकन्ने हैं” वाला बयान यह साफ करता है कि समाजवादी पार्टी चुनावी तैयारियों के साथ-साथ प्रक्रियात्मक निगरानी पर भी फोकस कर रही है।
लोकतंत्र की कसौटी पर SIR
मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव होती है। ऐसे में SIR जैसी प्रक्रिया पर विश्वास बना रहना बेहद ज़रूरी है। तारीखों में बदलाव भले ही प्रशासनिक हो, लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।