पीलीभीत का चर्चित अनिल हत्याकांड सोमवार को एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया, जब पुलिस ने मुख्य आरोपी वेद प्रकाश कश्यप को गिरफ्तार कर लिया। सिपाही से प्रॉपर्टी डीलर बने कश्यप की गिरफ्तारी मंत्री के हस्तक्षेप और बढ़ते जनदबाव के बाद हुई। लेकिन गिरफ्तारी के साथ ही कोतवाली का माहौल उग्र हो उठा। मृतक के परिजन भारी संख्या में वहां पहुंचे और आरोपी को सौंपने की मांग करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।
रहस्यमयी हालात में मिला था शव
शहर के मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी 25 वर्षीय अनिल का शव आईटीआई के पास स्थित एक निजी कंपनी के कार्यालय की छत पर फंदे से लटका मिला था। शुरुआती स्तर पर इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिजनों ने शुरू से ही हत्या का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अनिल को कुछ ऐसे राज की जानकारी हो गई थी, जो उसके लिए जानलेवा साबित हुआ। परिजनों के मुताबिक अनिल को कार्यालय मालिक वेद प्रकाश कश्यप और एक युवती के निजी संबंधों की जानकारी थी। इसी कारण उसे रास्ते से हटाया गया और पूरे घटनाक्रम को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी, बढ़ता आक्रोश
परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने उनकी तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने में देरी की। इसको लेकर आक्रोश बढ़ता गया और परिजन पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस पहुंच गए, जहां उन्होंने जमकर हंगामा किया। मामला राजनीतिक तूल पकड़ता गया। प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार मौके पर पहुंचे। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री की इस सख्ती के बाद मामला पलटा।
हत्या का मुकदमा, फिर गिरफ्तारी
राज्यमंत्री के निर्देशों के बाद वेद प्रकाश कश्यप, एक युवती और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ी और सोमवार सुबह मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी से पूछताछ जारी है और अन्य नामजद आरोपितों की तलाश की जा रही है। हालांकि अभी तक पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, जिससे तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कोतवाली में महिलाओं का गुस्सा
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कोतवाली के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। मृतक के परिजन, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, आरोपी को सार्वजनिक रूप से दिखाने की मांग पर अड़े रहे। कुछ देर के लिए हालात बेकाबू होते दिखे। अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। अधिकारियों ने समझाइश देकर दो प्रतिनिधियों को हवालात में आरोपी दिखाया। इसके बाद स्थिति शांत हुई और परिजन लौट गए।
कोतवाल पर कार्रवाई पर उठे सवाल
मंत्री की नाराजगी के बावजूद संबंधित कोतवाल पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि यदि मामले में देरी हुई तो जिम्मेदारी किसकी है? प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है और दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।