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बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से प्रेम और व्यक्तिगत आस्था से जुड़ी एक संवेदनशील कहानी सामने आई है, जहां मीरगंज की रहने वाली मुस्लिम युवती आशिया खान ने अपने प्रेमी मोनू से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मंदिर में विवाह किया। आशिया ने न सिर्फ अपना नाम बदलकर अंशिका रखा, बल्कि अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करते हुए सनातन धर्म को अपनाने की घोषणा भी की। दोनों का कहना है कि यह फैसला उन्होंने पूरी सहमति और बिना किसी दबाव के लिया है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सामने आई यह प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। मीरगंज कस्बे की रहने वाली आशिया खान ने अपने प्रेमी मोनू के साथ हिंदू रीति-रिवाज से मंदिर में शादी कर ली है। शादी के बाद आशिया ने अपना नाम बदलकर अंशिका रख लिया और सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म को अपनाया है।

मेले में हुई पहली मुलाकात

अंशिका बनी युवती ने बताया कि करीब चार साल पहले उसकी मुलाकात मोनू से भोजीपुरा क्षेत्र में लगे एक मेले के दौरान हुई थी। मेला घूमने के दौरान दोनों की बातचीत शुरू हुई और पहली ही मुलाकात में एक-दूसरे के प्रति आकर्षण महसूस हुआ। इसके बाद दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए और बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया।

 बातचीत से बढ़ा रिश्ता

समय के साथ दोनों की बातचीत गहरी दोस्ती में बदल गई। फोन पर नियमित बातचीत, मुलाकातें और एक-दूसरे के विचारों को समझने के बाद दोनों को एहसास हुआ कि वे एक-दूसरे के साथ अपना भविष्य देखना चाहते हैं। युवती का कहना है कि इस दौरान किसी तरह का दबाव या जबरदस्ती नहीं थी।

 चार साल से सनातन धर्म के प्रति झुकाव

अंशिका का दावा है कि वह पिछले चार वर्षों से सनातन धर्म के रीति-रिवाजों से प्रभावित थी। वह मंदिर जाती थी और हिंदू धार्मिक परंपराओं को जानने-समझने लगी थी। मोनू से मुलाकात के बाद उसका यह झुकाव और गहरा हो गया, लेकिन उसने धर्म परिवर्तन का फैसला पूरी तरह सोच-समझकर और अपनी इच्छा से लिया।

परिवार और निजी निर्णय

युवती ने बताया कि वह छह भाई-बहनों में से एक है, जिनमें चार भाई और दो बहनें हैं। उसने साफ कहा कि शादी और धर्म परिवर्तन का फैसला उसका निजी निर्णय है। किसी ने उसे न तो डराया और न ही किसी तरह का दबाव बनाया। उसने यह भी कहा कि वह बालिग है और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है।

 कागजी प्रक्रिया के बाद मंदिर में विवाह

दोनों ने शादी से पहले आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद वे बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे, जहां हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह संपन्न कराया गया। आश्रम के पंडितों द्वारा पहले युवती का शुद्धिकरण कराया गया।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया

आश्रम में युवती को गंगाजल का आचमन कराया गया, गायत्री मंत्र का जाप कराया गया और वैदिक विधि से शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद उसका नाम आशिया से बदलकर अंशिका रखा गया। इसके पश्चात विवाह संस्कार संपन्न कराया गया।

 हिंदू रीति-रिवाज से शादी

शुद्धिकरण के बाद मोनू और अंशिका ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए। दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। शादी के दौरान आश्रम में मौजूद लोगों ने इसे आपसी सहमति से हुआ विवाह बताया।

जोड़े का बयान

मोनू और अंशिका दोनों का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय आपसी सहमति और समझ से लिया है। उनका कहना है कि वे एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और शांति से अपना जीवन जीना चाहते हैं। उन्होंने प्रशासन से भी सुरक्षा की मांग की है ताकि वे बिना किसी डर के रह सकें।

सामाजिक चर्चा का विषय

यह विवाह स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रेम की जीत बता रहे हैं, वहीं कुछ वर्गों में इस पर बहस भी हो रही है। हालांकि, कानूनी रूप से दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार रखते हैं।

 प्रशासन की नजर

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में है और यदि किसी भी पक्ष को कोई खतरा महसूस होता है तो सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है।

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