नई दिल्ली। एशेज सीरीज 2025-26 का आखिरी टेस्ट सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास में दर्ज होने वाला एक बड़ा अध्याय बन चुका है। जैसे ही सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने उतरीं, उसी पल 137 साल पुरानी परंपरा टूट गई। यह वह पल था, जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरानी, बहस और रोमांच से भर दिया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने ऐसा फैसला लिया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। सिडनी जैसे मैदान पर, जिसे दशकों से स्पिन गेंदबाजों का गढ़ माना जाता रहा है, ऑस्ट्रेलिया पहली बार बिना किसी स्पिन गेंदबाज के टेस्ट खेलने उतरा। यह फैसला न सिर्फ साहसिक था, बल्कि ऐतिहासिक भी।
137 साल बाद टूटी परंपरा
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर साल 1888 के बाद यह पहला मौका है, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी प्लेइंग इलेवन में एक भी स्पिनर को जगह नहीं दी। क्रिकेट इतिहास के जानकारों के मुताबिक, SCG की पिच हमेशा से स्पिनरों को मदद देने के लिए जानी जाती रही है। शेन वॉर्न से लेकर नाथन लायन तक, इस मैदान ने कई दिग्गज स्पिनरों को जन्म दिया है। लेकिन एशेज 2025-26 के आखिरी टेस्ट में स्टीव स्मिथ ने इस परंपरा को तोड़ने का साहस किया और इतिहास का रुख ही बदल दिया।
कप्तान स्मिथ का मास्टरस्ट्रोक या बड़ा जोखिम?
मैच से पहले ऑस्ट्रेलिया की 12 सदस्यीय टीम में स्पिनर टॉड मर्फी को शामिल किया गया था। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा था कि मर्फी अंतिम-11 का हिस्सा होंगे। लेकिन टॉस के वक्त जब प्लेइंग इलेवन सामने आई, तो हर कोई चौंक गया। स्टीव स्मिथ ने टॉड मर्फी को बाहर रखते हुए ब्यू वेबस्टर को मौका दिया। वेबस्टर एक राइट-आर्म मीडियम पेसर और उपयोगी बल्लेबाज हैं। यह फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि स्मिथ ने भावनाओं से नहीं, बल्कि पिच रिपोर्ट और परिस्थितियों के आधार पर टीम चुनी।
पिच ने बदला कप्तान का फैसला
सिडनी टेस्ट के लिए क्यूरेटर ने पिच पर हल्की घास छोड़ी है। आमतौर पर SCG की पिच पांचवें दिन टूटती है और स्पिनरों को मदद देती है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। घास होने की वजह से नई गेंद से तेज गेंदबाजों को स्विंग और सीम मूवमेंट मिलने की संभावना है। स्टीव स्मिथ ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए स्पिन की जगह पेस पर भरोसा जताया। उनका मानना है कि इंग्लैंड के बल्लेबाजों को शुरुआती और मध्य ओवरों में पेस से ज्यादा परेशानी होगी।
इंग्लैंड ने जीता टॉस, पहले बल्लेबाजी
सिडनी टेस्ट में इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। स्टोक्स का यह फैसला भी पिच की शुरुआती मदद को देखते हुए लिया गया है। इंग्लैंड की कोशिश होगी कि वह पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाकर ऑस्ट्रेलिया पर दबाव डाले। पांच मैचों की एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया पहले ही अजेय बढ़त बना चुका है। कंगारुओं ने पहले तीन टेस्ट जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली थी, जबकि इंग्लैंड ने मेलबर्न टेस्ट जीतकर सम्मान बचाया था।सीरीज तो ऑस्ट्रेलिया की, लेकिन दांव पर है इतिहास भले ही सीरीज का फैसला हो चुका हो, लेकिन सिडनी टेस्ट का महत्व कम नहीं है। यह मैच सम्मान, इतिहास और रणनीति की लड़ाई बन चुका है। इंग्लैंड जहां जीत के साथ सीरीज खत्म करना चाहेगा, वहीं ऑस्ट्रेलिया स्मिथ के ऐतिहासिक फैसले को सही साबित करना चाहेगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऑस्ट्रेलिया यह टेस्ट जीत जाता है, तो स्टीव स्मिथ का यह फैसला आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। वहीं अगर यह दांव उल्टा पड़ा, तो आलोचना भी उतनी ही तीखी होगी।
क्रिकेट जगत की नजरें स्मिथ पर
सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट पैनल्स तक, हर जगह सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है— क्या सिडनी में बिना स्पिनर खेलना सही फैसला था? स्टीव स्मिथ पहले भी अपने अनोखे फैसलों के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन यह फैसला उनके कप्तानी करियर का सबसे बड़ा जुआ माना जा रहा है।
एशेज 2025-26 का आखिरी टेस्ट अब सिर्फ एक मुकाबला नहीं रहा। यह परंपरा बनाम आधुनिक सोच, स्पिन बनाम पेस और साहस बनाम जोखिम की कहानी बन चुका है। सिडनी की धरती पर 137 साल बाद इतिहास बदला है, और इसका जिम्मेदार एक नाम है—स्टीव स्मिथ। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह ऐतिहासिक फैसला ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाता है या इंग्लैंड इसे अपनी वापसी की कहानी बना देता है।