लखनऊ। असम विधानसभा चुनाव ने लखनऊ की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है। 200 से अधिक सफाई कर्मियों के अपने गृह राज्य लौटने से राजधानी में कूड़ा उठान व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। हालात यह हैं कि करीब 70 हजार घरों से नियमित कचरा नहीं उठ रहा और शहर के कई इलाकों में गंदगी के ढेर लग गए हैं।
एक-तिहाई स्टाफ गायब, शहर में कूड़े का संकट
अधिकारियों के मुताबिक निजी एजेंसियों के तहत काम करने वाले करीब एक-तिहाई सफाई कर्मचारी छुट्टी पर चले गए हैं। असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में हिस्सा लेने के लिए कर्मचारी अपने घर लौटे हैं। इसके चलते डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, सड़क सफाई और नालियों की सफाई पर सीधा असर पड़ा है। यह स्थिति कम से कम 15 अप्रैल तक बनी रह सकती है।
निजी एजेंसियों के भरोसे 110 वार्डों की सफाई
लखनऊ नगर निगम के 110 वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह निजी एजेंसियों पर निर्भर है।
- लखनऊ स्वच्छता अभियान (LSA) – 77 वार्ड
- लायंस एनवायरो (Lions Enviro) – 33 वार्ड
LSA के करीब 600 कर्मचारियों में से 150 से अधिक छुट्टी पर हैं, जबकि Lions Enviro के भी लगभग 70 कर्मचारी अनुपस्थित हैं। इससे सफाई व्यवस्था लड़खड़ा गई है।
वैकल्पिक व्यवस्था भी पड़ रही नाकाफी
LSA के क्षेत्रीय प्रमुख अभय रंजन के मुताबिक स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त ड्राइवर और सफाई कर्मी जोड़कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है। वहीं Lions Enviro ने बाराबंकी समेत आसपास के जिलों से कर्मचारी बुलाने की पहल की है, लेकिन हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ पा रहे।
रोज 1800 टन कचरा, सिस्टम पर बढ़ा दबाव
लखनऊ में रोजाना करीब 1800 टन कचरा निकलता है, जिसमें से लगभग 1700 टन कचरा शिवरी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है। लेकिन डोर-टू-डोर कलेक्शन प्रभावित होने से पूरा कचरा प्रबंधन तंत्र गड़बड़ा गया है।
लोगों में नाराजगी, बदबू से हाल बेहाल
फैजुल्लागंज निवासी पल्लवी सिन्हा ने बताया कि कई दिनों से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नहीं आ रहीं, जिससे घरों में कचरा जमा हो रहा है। वहीं ममता नाम की एक अन्य महिला ने कहा कि कूड़े की बदबू से हालात खराब हो गए हैं। कई जगह निजी कूड़ा कलेक्टर भी नहीं आ रहे, क्योंकि वे भी चुनाव के लिए अपने राज्यों में गए हुए हैं।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
चौक के पार्षद अनुराग मिश्रा ने कहा कि पुराने शहर की गलियों में अतिरिक्त सफाई कर्मियों की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा कमी से हालात बिगड़ गए हैं। इस्माइलगंज के पार्षद मुकेश चौहान ने सवाल उठाया कि चुनाव पहले से तय था, फिर भी तैयारी क्यों नहीं की गई।
मेयर का दावा—जल्द पटरी पर आएगी व्यवस्था
मेयर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि नगर निगम लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जल्द ही सफाई व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक अगले सप्ताह तक अधिकतर कर्मचारी लौट आएंगे, जिसके बाद हालात सुधरने की उम्मीद है।