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गुड फ्राइडे के पावन अवसर पर बरेली में ऐसा आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जहां हर दिल प्रभु यीशु के बलिदान की पीड़ा और प्रेम के संदेश में डूब गया। चर्चों में गूंजती प्रार्थनाएं, नम आंखें और सन्नाटा—सब कुछ इस दिन को आत्मा तक छू जाने वाला बना गया।

‘क्रूस का दर्द’: जब शहर हुआ श्रद्धा में नतमस्तक

शुक्रवार को गुड फ्राइडे के अवसर पर बरेली का हर कोना श्रद्धा और करुणा के रंग में रंगा नजर आया। शहर के प्रमुख गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालु प्रभु यीशु के बलिदान को स्मरण करने पहुंचे। चर्च परिसर में पसरा सन्नाटा, धीमी प्रार्थनाओं की गूंज और नम आंखें इस बात का प्रमाण थीं कि यह दिन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और समर्पण का अवसर है। हर व्यक्ति अपने भीतर झांकता हुआ, प्रभु के त्याग और प्रेम को महसूस करता दिखाई दिया।

‘सात वचनों’ का संदेश: क्षमा, प्रेम और त्याग की सीख

गुड फ्राइडे की आराधना के दौरान प्रभु यीशु के ‘सात वचनों’ पर विशेष प्रकाश डाला गया। पादरियों ने इन वचनों को केवल धार्मिक कथन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला संदेश बताया। उन्होंने कहा कि इन वचनों में क्षमा, प्रेम, सहनशीलता और मानवता का सार छिपा है। इन शिक्षाओं को सुनते हुए श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। यह क्षण ऐसा था, जहां हर व्यक्ति अपने जीवन के अर्थ को नए नजरिए से देखने लगा।

भजनों की मधुर धुन: जब हर शब्द बना प्रार्थना

क्राइस्ट मैथोडिस्ट चर्च में पादरी सुनील मसीह के नेतृत्व में प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ। पादरी प्रमोद नंदा ने बाइबिल का पाठ किया, जिसने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। चर्च क्वायर की ओर से नीलिमा वेली, एंजलीना स्मार्ट, रमनीक मैसी सहित अन्य कलाकारों ने डॉ. सलिल बलदेव के निर्देशन में भजन प्रस्तुत किए। इन भजनों की मधुर धुनों ने ऐसा वातावरण रचा कि हर शब्द सीधे ईश्वर तक पहुंचता हुआ महसूस हुआ। श्रद्धालु आंखें बंद कर पूरी तरह इस आध्यात्मिक अनुभव में खो गए।

सजावट में दिखा बलिदान: हर प्रतीक ने सुनाई कहानी

चर्चों को विशेष रूप से लिली के फूलों, कांटों के ताज और लाल वस्त्रों से सजे क्रूस के साथ सजाया गया। यह सजावट सिर्फ सौंदर्य के लिए नहीं थी, बल्कि प्रभु यीशु के कष्ट और बलिदान का प्रतीक बनी। क्रूस के सामने खड़े श्रद्धालु गहरे चिंतन में डूबते नजर आए। हर फूल, हर प्रतीक और हर रंग मानो एक कहानी कह रहा था—बलिदान, प्रेम और त्याग की कहानी।

‘वे ऑफ द क्रॉस’: आस्था का चलता-फिरता महासागर

सेंट अल्फोंसस महागिरजाघर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर बाद ‘वे ऑफ द क्रॉस’ (क्रूस रास्ता) का जुलूस निकाला गया, जिसमें प्रभु यीशु के अंतिम क्षणों की झांकियां प्रस्तुत की गईं। इस जुलूस में शामिल श्रद्धालु हर पड़ाव पर रुककर प्रार्थना करते और प्रभु के कष्टों को याद करते नजर आए। हर कदम पर श्रद्धा, हर चेहरे पर भावनाएं—यह जुलूस आस्था का जीवंत दृश्य बन गया। पूरा वातावरण भक्ति की लहर में डूबा हुआ दिखाई दिया।

धर्मगुरुओं का संदेश: प्रेम ही मानवता की असली ताकत

धर्माध्यक्ष इग्नेशियस डिसूजा, फादर स्टैनी और अन्य धर्मगुरुओं ने अपने संदेश में कहा कि गुड फ्राइडे हमें प्रेम, क्षमा और सहनशीलता का पाठ सिखाता है। उन्होंने कहा कि नफरत से कभी शांति नहीं मिलती, बल्कि प्रेम और करुणा ही समाज को जोड़ते हैं। आलोकनगर स्थित इंटरडिपेंडेंट बैप्टिस्ट चर्च में भी इवेंजलिस्ट राज कुमार सिंह और रेव्ह. डॉ. विलियम सैमुअल ने आध्यात्मिक प्रवचन दिए। इन संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया।

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