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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पोस्टरबाजी के बहाने देशविरोधी साजिश रची जा रही थी। फ्लाइट लेकर आए संदिग्धों ने मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर पाकिस्तान समर्थक और आतंकी संगठनों के पक्ष में पोस्टर चिपकाए, फिर उनके वीडियो बनाकर विदेश बैठे हैंडलर को भेज दिए। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस गुप्त ऑपरेशन का पर्दाफाश करते हुए 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क बांग्लादेश से ऑपरेट हो रहा था और कमान एक कश्मीरी हैंडलर के हाथ में थी।

दिल्ली पोस्टर साजिश: फ्लाइट, फर्जी ID और विदेशी हैंडलर… आतंकी नेटवर्क की पूरी कहानी

दिल्ली की मेट्रो, जो आमतौर पर लाखों यात्रियों की रफ्तार का प्रतीक है, अचानक एक ऐसी साजिश का मंच बन गई जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया। सुप्रीम कोर्ट और जनपथ मेट्रो स्टेशन के आसपास लगे पाकिस्तान समर्थक और आतंकी संगठनों के पोस्टरों ने राजधानी में हड़कंप मचा दिया। शुरुआत 8 फरवरी को हुई जब CISF ने शिकायत दर्ज कराई कि मेट्रो परिसर में संदिग्ध पोस्टर लगाए गए हैं। जांच के दौरान कश्मीरी गेट मेट्रो के पिलर और अन्य स्थानों पर भी ऐसे पोस्टर मिले। पोस्टरों में Jaish-e-Mohammed के आतंकी बुरहान वानी की तस्वीरों को महिमामंडित किया गया था। साथ ही ‘India Stop Genocide and Free Kashmir’ जैसे संदेश और ‘हम पाकिस्तानी हैं’ जैसे नारे लिखे थे।

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा मॉड्यूल

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच का दायरा बढ़ाया। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर 15 फरवरी को कोलकाता मॉड्यूल पर छापा मारा गया। वहां से दो संदिग्ध—उमर और रोबिडल—गिरफ्तार किए गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग Lashkar-e-Taiba के हैंडलर से जुड़े थे। स्पेशल सीपी प्रमोद सिंह कुशवाह के मुताबिक, पकड़े गए 8 संदिग्धों में से 7 बांग्लादेशी नागरिक हैं, जिन्होंने चंद पैसों में फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाए। पहचान छिपाने के बाद इन्हें भारत में घुसपैठ कर स्लीपर मॉड्यूल की तरह काम करने का निर्देश दिया गया था।

बांग्लादेश से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क

पूछताछ में सामने आया कि पूरा ऑपरेशन बांग्लादेश में बैठे हैंडलर के नियंत्रण में था। मुख्य हैंडलर के तौर पर शब्बीर अहमद लोन का नाम सामने आया, जो मूलतः श्रीनगर का रहने वाला बताया गया है। बताया गया कि उसका मकसद भारत में ऐसे लोगों का नेटवर्क खड़ा करना था जिनके पास भारतीय पहचान हो, ताकि आतंकी गतिविधियां बिना शक के चलाई जा सकें। उमर ने कबूल किया कि वह मार्च 2025 में शब्बीर के संपर्क में आया। उसे भारत में ऑपरेशन लीड करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

फ्लाइट से आए, पोस्टर लगाए और लौट गए

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यात्रा पैटर्न को लेकर हुआ। 6 फरवरी को उमर और रोबिडल ने कोलकाता से पटना होते हुए दिल्ली के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट ली। 7 फरवरी की रात दिल्ली के 10 अलग-अलग स्थानों पर पोस्टर चिपकाए गए। केवल पोस्टर लगाकर ही वे नहीं रुके—उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग की और उसे हैंडलर को भेजा, ताकि ‘मिशन पूरा’ होने का सबूत दिया जा सके। 8 फरवरी को दोनों ट्रेन से वापस कोलकाता लौट गए। यह पूरा ऑपरेशन करीब 9 दिन तक गुपचुप तरीके से चलता रहा।

तमिलनाडु से जुड़े 6 और संदिग्ध

जांच में एक और बांग्लादेशी हैंडलर, सैद-उल-इस्लाम का नाम सामने आया। उसके जरिए छह अन्य संदिग्धों को जोड़ा गया, जो तमिलनाडु में मौजूद थे। स्पेशल सेल ने लोकल पुलिस के सहयोग से इन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल पोस्टरबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि भविष्य में बड़े आतंकी हमले की तैयारी का हिस्सा हो सकता था।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

यह मामला कई स्तरों पर चिंता बढ़ाता है:

  • फर्जी भारतीय पहचान पत्र के जरिए घुसपैठ
  • फ्लाइट और ट्रेन नेटवर्क का इस्तेमाल
  • राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में पोस्टरबाजी
  • विदेशी हैंडलर से सीधा संपर्क

सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या और भी स्लीपर मॉड्यूल सक्रिय हैं।

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