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बरेली के प्रेमनगर इलाके में संतोषी माता मंदिर के निर्माण को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद आखिरकार शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। पुलिस की सक्रिय भूमिका और मौके पर मौजूदगी के चलते न केवल स्थिति नियंत्रण में आई, बल्कि विधिवत भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण कार्य की शुरुआत भी कराई गई। यह मामला उस वक्त और संवेदनशील हो गया था, जब करीब 50 हिंदू परिवारों ने सामूहिक धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी थी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया था।

प्रेमनगर में मंदिर निर्माण विवाद का पटाक्षेप

बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के भूड़ इलाके में स्थित संतोषी माता मंदिर को लेकर चला आ रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। पुलिस प्रशासन की सूझबूझ और समय पर हस्तक्षेप से न सिर्फ कानून व्यवस्था कायम रही, बल्कि वर्षों पुराने मंदिर के निर्माण और जीर्णोद्धार का रास्ता भी साफ हो गया। थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार और चौकी इंचार्ज मोहम्मद सरताज की मौजूदगी में मंदिर परिसर में भूमि पूजन कराया गया और निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत की गई।

70 साल पुराना है संतोषी माता मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार संतोषी माता का यह मंदिर करीब 70 साल पुराना है और लंबे समय से इलाके के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। समय के साथ मंदिर की हालत जर्जर हो गई थी, जिस कारण स्थानीय श्रद्धालु इसके जीर्णोद्धार और नए निर्माण की मांग कर रहे थे। हालांकि, कुछ लोगों के विरोध और आपसी मतभेद के चलते यह मामला विवाद का रूप लेता चला गया।

दबंगों के विरोध से बढ़ा तनाव

स्थानीय निवासियों का आरोप था कि कुछ दबंग किस्म के लोग मंदिर निर्माण में लगातार बाधा डाल रहे थे। इसी कारण इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। शुरुआत में मामला आपसी बातचीत तक सीमित रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह विवाद गंभीर होता चला गया। हालात ऐसे बन गए कि इलाके में अशांति फैलने की आशंका पैदा हो गई।

धर्म परिवर्तन की चेतावनी से मचा हड़कंप

विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया जब इलाके के करीब 50 हिंदू परिवारों ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दे दी। इस खबर के सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आक्रोशित लोग अपनी शिकायत लेकर सीधे प्रेमनगर थाने पहुंच गए और पुलिस से न्याय की मांग की।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

शिकायत मिलते ही थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार और चौकी इंचार्ज मोहम्मद सरताज ने मामले को गंभीरता से लिया। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर बातचीत कराई गई। पुलिस ने साफ किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी पक्षों को कानूनी दायरे में रहकर समाधान निकालना होगा।

आपसी सहमति से निकला समाधान

थाने में हुई लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान पर पहुंचे। पुलिस की मध्यस्थता में यह तय हुआ कि मंदिर निर्माण कार्य शांतिपूर्ण तरीके से कराया जाएगा और किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं होगी। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में मंदिर परिसर में भूमि पूजन का कार्यक्रम तय किया गया।

पुलिस की मौजूदगी में भूमि पूजन

निर्धारित समय पर थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज स्वयं मौके पर पहुंचे। पुलिस बल की मौजूदगी में विधिवत पूजा-अर्चना और भूमि पूजन कराया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

प्रसाद वितरण और लोगों की राहत

भूमि पूजन के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के खत्म होने पर क्षेत्रीय लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों ने पुलिस प्रशासन की भूमिका की जमकर सराहना की और कहा कि यदि समय रहते पुलिस ने हस्तक्षेप न किया होता, तो स्थिति बिगड़ सकती थी।

पुलिस का सख्त संदेश

प्रेमनगर थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण को लेकर अब किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। सभी पक्ष सहमत हैं और निर्माण कार्य कानून के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि भविष्य में किसी तरह का तनाव दोबारा न पैदा हो।

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