Social Sharing icon

बरेली में नगर निगम की नई कर निर्धारण सूची ने व्यापारिक जगत में भूचाल ला दिया है। 700 रुपये से सीधे 14 हजार रुपये तक किराया बढ़ाए जाने के फैसले के विरोध में सैकड़ों व्यापारी सड़कों पर उतर आए। नगर निगम कार्यालय का घेराव, तीखी नारेबाजी और धरने के बीच व्यापारियों ने इसे ‘टैक्स बम’ करार देते हुए तत्काल रोलबैक की मांग की है।

नगर निगम बरेली के व्यापारियों ने घेरा निगम, जमकर हुई नारेबाजी

शहर की फिजा बुधवार को नारों और आक्रोश से भर गई जब सैकड़ों व्यापारी अचानक नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। वजह नगर निगम की नई कर निर्धारण सूची, जिसमें 700 रुपये से चल रहा दुकान किराया सीधे 14,000 रुपये तक पहुंचा दिया गया। यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम दुकानदारों की कमर तोड़ देने वाला फैसला माना जा रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व पार्षद राजेश अग्रवाल ने किया। निगम परिसर में धरना, नारेबाजी और अधिकारियों के साथ तीखी बहस देखने को मिली।

700 से 14 हजार… 20 गुना बढ़ोतरी का गणित

व्यापारियों के मुताबिक यह बढ़ोतरी “व्यावहारिक नहीं, राजनीतिक और मनमानी” है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि पहले ही बाजारों में मंदी, जीएसटी की जटिलता, ऑनलाइन कारोबार की मार और बढ़ती लागत से वे जूझ रहे हैं। ऐसे में 20 गुना तक किराया बढ़ा देना “आर्थिक सज़ा” जैसा है। एक व्यापारी नेता ने कहा, “अगर 700 रुपये की जगह 14 हजार देने पड़ेंगे तो दुकान चलाएं या घर?” व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि टैक्स तय करने से पहले ना तो सही सर्वे कराया गया और ना ही वास्तविक व्यापारिक स्थिति का आकलन किया गया।

टैक्स कमेटी पर सवाल… “सुनवाई का नाटक?”

प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा सवाल नगर निगम द्वारा गठित टैक्स कमेटी की भूमिका को लेकर उठे। व्यापारियों का कहना है कि कमेटी में कई बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। “जब सुनवाई होनी ही नहीं थी, तो कमेटी बनाने का क्या मतलब?” यह सवाल धरना स्थल पर कई बार गूंजा। व्यापारी संगठनों ने आरोप लगाया कि रेट तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। उन्हें आशंका है कि कई क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न दरें बिना ठोस आधार के लागू कर दी गईं।

निगम घेराव, नारे और चेतावनी

दोपहर तक निगम कार्यालय के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई।

  • “टैक्स बम वापस लो”,
  • “व्यापारी विरोधी फैसला रद्द करो”,
  • जैसे नारे गूंजते रहे।

कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण भी हो गई, हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता का भरोसा दिलाया।फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक वार्ता की तैयारी चल रही है।

रोलबैक नहीं तो अगला कदम?

व्यापारिक संगठनों ने साफ चेतावनी दी है—

  • बाजार बंद किया जाएगा
  • बड़े स्तर पर धरना होगा
  • जनप्रतिनिधियों का घेराव किया जाएगा
  • शहरव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा

व्यापारियों का कहना है कि यह सिर्फ किराये का मुद्दा नहीं, बल्कि “अस्तित्व की लड़ाई” है। शहर के प्रमुख बाजारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है। कई व्यापार मंडलों ने आपात बैठक बुला ली है।

शहर की अर्थव्यवस्था पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है तो:

  • खुदरा बाजार प्रभावित हो सकते हैं
  • उपभोक्ताओं पर कीमतों का बोझ बढ़ सकता है
  • छोटे व्यापारी बंदी की कगार पर पहुंच सकते हैं

बरेली का व्यापारिक ढांचा पारंपरिक दुकानों पर टिका है। यदि किराया कई गुना बढ़ेगा तो उसका असर सीधे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *