नई दिल्ली/लखनऊ। देश में बिजली के बढ़ते बिलों के बीच अब एक ऐसी क्रांति आकार ले रही है, जिसने आम आदमी की जिंदगी बदलनी शुरू कर दी है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के जरिए अब लाखों परिवार अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर खुद बिजली बना रहे हैं और हर महीने आने वाला भारी-भरकम बिल लगभग शून्य हो चुका है। यह योजना सिर्फ राहत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बनकर उभरी है।
धूप से दौड़ रही ‘बचत की मशीन’… आम आदमी बना ऊर्जा उत्पादक
भारत में छतों पर लगने वाले सोलर पैनल अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में बदलाव की कहानी बन चुके हैं। साहिबाबाद निवासी विनोद अग्रवाल की कहानी इस बदलाव का जीता-जागता उदाहरण है। पड़ोसियों के ‘जीरो बिजली बिल’ ने उन्हें प्रेरित किया और उन्होंने भी सोलर सिस्टम लगवाने का फैसला लिया। आज स्थिति यह है कि विनोद जैसे लाखों लोग अपनी छत को मिनी पावर स्टेशन बनाकर न केवल अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर आय का रास्ता भी खोल रहे हैं। देशभर में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और लोग पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम कर रहे हैं।
₹75,021 करोड़ का मास्टर प्लान… 1 करोड़ घरों तक पहुंचने का लक्ष्य
13 फरवरी 2024 को लॉन्च हुई इस महत्वाकांक्षी योजना ने महज दो साल में बड़ा असर दिखाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं और करीब 12.5 लाख परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है। सरकार ने 2027 तक इस योजना को 1 करोड़ घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए ₹75,021 करोड़ का विशाल बजट निर्धारित किया गया है। योजना के तहत प्रत्येक परिवार को ₹78,000 तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सोलर सिस्टम लगवाना अब आम आदमी के लिए भी आसान हो गया है।
गुजरात से यूपी तक… छतें बनीं ‘मिनी पावर स्टेशन’
इस योजना के क्रियान्वयन में गुजरात सबसे आगे निकलकर सामने आया है। यहां 11.9 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन के साथ 6.6 गीगावॉट की क्षमता विकसित हो चुकी है। निकोल के कारोबारी अंकित कथरोटिया ने 4 किलोवाट का सिस्टम लगाकर अपने बिजली बिल को लगभग समाप्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश में भी योजना का असर तेजी से दिख रहा है। वाराणसी की अनुमति यादव ने 3 किलोवाट सोलर सिस्टम लगाकर हर महीने करीब ₹6,000 की बचत शुरू कर दी है। यह बचत अब उनकी बेटी के इलाज में काम आ रही है। महाराष्ट्र के नागपुर में भी 67 हजार से ज्यादा सोलर सिस्टम लग चुके हैं, जहां अक्षय चौहान जैसे लोगों का बिजली बिल अब पूरी तरह खत्म हो गया है। यह उदाहरण बताते हैं कि यह योजना सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी ला रही है।
चुनौतियां भी कम नहीं… लोन, क्वालिटी और धूल बनी बाधा
हालांकि इस क्रांति के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बैंकों से लोन लेने की प्रक्रिया अभी भी जटिल है, जिससे आम लोगों को देरी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सस्ते और घटिया उपकरण लगाने से सोलर सिस्टम की क्षमता प्रभावित होती है। धूल और छांव जैसे कारकों के कारण पैनलों की दक्षता 20-30% तक घट सकती है, जिससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। सरकार ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए नेशनल पोर्टल के जरिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। 10kW तक के सिस्टम के लिए मंजूरी आसान कर दी गई है और 15555 हेल्पलाइन नंबर के जरिए 12 भाषाओं में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
कैसे लें योजना का लाभ? (प्रक्रिया आसान, फायदा बड़ा)
योजना का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ता को नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद अनुमोदित वेंडर के जरिए सोलर सिस्टम लगाया जाता है। सब्सिडी सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है। सरकार कम ब्याज दर पर बिना गारंटी लोन की सुविधा भी दे रही है, जिसे 10 साल में चुकाया जा सकता है। नेट मीटरिंग के जरिए उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेच भी सकता है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत बनता है।