बरेली कलेक्ट्रेट में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मंडल आयुक्त भूपेंद्र सिंह अचानक निरीक्षण पर पहुंच गए। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी। फाइलों में दबे मामलों से लेकर साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आई, जिसके बाद कमिश्नर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए। यह निरीक्षण केवल औपचारिक नहीं, बल्कि सिस्टम को झकझोर देने वाला साबित हुआ।
अचानक एंट्री से मचा हड़कंप, कलेक्ट्रेट में तेज हुई हलचल
गुरुवार को बरेली कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब मंडल आयुक्त भूपेंद्र सिंह बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। उनके पहुंचते ही अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल तेज हो गई। हर कोई अपनी-अपनी व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुट गया। लंबे समय से चल रही प्रशासनिक दिनचर्या अचानक सख्ती के मोड में आ गई और पूरे कलेक्ट्रेट में ‘निरीक्षण अलर्ट’ की स्थिति बन गई।
विभाग-दर-विभाग जांच… रिकॉर्ड से लेकर सिस्टम तक की पड़ताल
मंडल आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान शस्त्र विभाग, नाजिर कार्यालय और लेखागार विभाग में पहुंचकर कामकाज की गहन समीक्षा की। उन्होंने रिकॉर्ड के रखरखाव, फाइलों की स्थिति और कार्यप्रणाली को बारीकी से परखा। कई जगहों पर दस्तावेजों के रखरखाव में कमी और लापरवाही सामने आई। हालांकि ट्रेजरी और चकबंदी विभाग सहित कुछ विभागों का निरीक्षण नहीं किया गया, लेकिन जिन विभागों की जांच हुई, वहां की स्थिति ने प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया।
फाइलों में दबा सच… लंबित मामलों पर फूटा गुस्सा
निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा चिंता का विषय लंबित फाइलें रहीं। कई कार्यालयों में महीनों से पड़ी शिकायतों और मामलों को देखकर मंडल आयुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम जनता की समस्याओं को फाइलों में दबाकर नहीं रखा जा सकता। लंबित मामलों को तत्काल निपटाने के निर्देश देते हुए उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
साफ-सफाई और सुविधाओं पर भी सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी जांची गई। कुछ स्थानों पर अव्यवस्था और गंदगी पाए जाने पर मंडल आयुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि परिसर में साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जाए और पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं बेहतर स्थिति में रखी जाएं। उनका कहना था कि आम जनता को सरकारी कार्यालयों में सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए।
‘पारदर्शिता ही प्राथमिकता’… प्रशासन को दी सख्त हिदायत
मंडल आयुक्त भूपेंद्र सिंह ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनहित सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनता के प्रति संवेदनशील रहें और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करें।
आला अफसर रहे मौजूद… अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एडीएम सिटी सौरभ दुबे, एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह, एडीएम एफआर संतोष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने कमिश्नर के निर्देशों को गंभीरता से लिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन निर्देशों का कितना प्रभावी पालन होता है और क्या वास्तव में सिस्टम में सुधार देखने को मिलता है या नहीं।