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देश की राजधानी से सटे गाजियाबाद में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यहां बैठकर एक पूरा नेटवर्क पाकिस्तान तक खुफिया जानकारी पहुंचा रहा था—वीडियो, फोटो और लोकेशन… सबकुछ। महिला समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं।

NCR में ‘जासूसी नेटवर्क’ का खुलासा… पाकिस्तान तक पहुंच रही थी जानकारी

गाजियाबाद। ट्रांस हिंडन क्षेत्र (टीएचए) में पुलिस ने एक ऐसे संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका था। आरोप है कि यह गिरोह भारत के सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें, वीडियो और सटीक लोकेशन पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भेज रहा था। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे दिल्ली-एनसीआर में हड़कंप मच गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा तेजी से बढ़ा दिया है।

कैमरों से जासूसी… हाईटेक तरीके से जुटाई जा रही थी जानकारी

जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से जासूसी कर रहे थे। उन्होंने कई संवेदनशील स्थानों के आसपास हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, जिनके जरिए लगातार रिकॉर्डिंग की जाती थी। इन फुटेज को बाद में पाकिस्तान भेजा जाता था। आरोपियों में शामिल रितिक गंगवार को कैमरे लगाने में माहिर बताया जा रहा है, जिसने दिल्ली से अत्याधुनिक उपकरण खरीदकर इस नेटवर्क को मजबूत किया। यह तरीका न सिर्फ खतरनाक था, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती भी बन गया था।

महिला समेत 6 आरोपी गिरफ्तार… कई और रडार पर

कौशांबी थाना पुलिस ने 14 मार्च को महिला समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें मेरठ निवासी सुहेल मलिक उर्फ रोमियो, संभल निवासी साने करम उर्फ महक, भोवापुर के प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी सुहेल का पाकिस्तान में बैठे आकाओं से सीधा संपर्क था। वह उनके निर्देश पर पूरे नेटवर्क को संचालित करता था और अन्य सदस्यों को भुगतान भी करता था। हालांकि, वह लेनदेन के लिए अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करता था, जिससे जांच और जटिल हो गई है।

बैंक खाते फ्रीज… पैसों के नेटवर्क की भी जांच तेज

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा उनसे जुड़े अन्य खातों और लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस को एक ऐसा खाता मिला है, जिसके जरिए पैसे का लेनदेन होने की आशंका है। साथ ही, करीब एक दर्जन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे फंडिंग कहां से हो रही थी और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।

NIA और केंद्रीय एजेंसियां एक्टिव… देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब इस केस की गहराई से जांच कर रही हैं। आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे पाकिस्तान में बैठे आकाओं के साथ हुई बातचीत, भेजी गई लोकेशन और वीडियो का पूरा डेटा सामने आने की उम्मीद है। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि मामले की जांच जारी है और किसी भी साजिश को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले नेटवर्क कितने खतरनाक और संगठित हो सकते हैं।

देश के लिए चेतावनी… ‘डिजिटल जासूसी’ का नया खतरा

यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा अलर्ट है। डिजिटल तकनीक और हाईटेक उपकरणों का गलत इस्तेमाल किस तरह देश के खिलाफ हो सकता है, इसका यह ताजा उदाहरण है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

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