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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि यदि हालात बिगड़े तो ईरान की नौसेना को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अमेरिकी सैन्य आकलन रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना (IRGC Navy) फारस की खाड़ी में माइंस बिछाने, तेज हमलावर नौकाओं और पनडुब्बियों के जरिए समुद्री व्यापार को रोकने की क्षमता रखती है।

मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव, समुद्र में छिड़ सकता है बड़ा टकराव

मध्य-पूर्व की राजनीति और सैन्य रणनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को वैश्विक चर्चा का केंद्र बना दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर हालात और बिगड़े तो ईरान की नौसेना को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। यह बयान सिर्फ राजनीतिक चेतावनी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी सैन्य रणनीति की बड़ी योजना भी छिपी बताई जा रही है।

क्यों अमेरिका को सबसे ज्यादा डर ईरानी नौसेना से?

अक्सर दुनिया में चर्चा ईरान के परमाणु कार्यक्रम या बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर होती रही है, लेकिन अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असली खतरा ईरान की नौसेना से भी उतना ही बड़ा है। ईरान की समुद्री ताकत पारंपरिक युद्ध से ज्यादा गुरिल्ला समुद्री रणनीति पर आधारित है। छोटी-छोटी तेज नावों, पनडुब्बियों और माइंस बिछाने की रणनीति के जरिए ईरान फारस की खाड़ी में बड़े जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बना सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता

ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से हर दिन दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अनुमान के मुताबिक वैश्विक ऊर्जा व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

माइंस बिछाने की रणनीति से डरता है अमेरिका

अमेरिकी नौसेना के आकलन के मुताबिक ईरान की IRGC नौसेना समुद्र में माइंस बिछाने की तकनीक में बेहद माहिर है। समुद्र में बिछाई गई माइंस किसी भी गुजरने वाले जहाज को पलभर में तबाह कर सकती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों को डर है कि अगर युद्ध छिड़ा तो ईरान कुछ ही घंटों में समुद्री व्यापार को बाधित कर सकता है।

ड्रोन कैरियर और आधुनिक युद्धपोत

ईरान ने हाल के वर्षों में अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने की कोशिश भी की है।

IRIS Shahid Bagheri – इसे एक कमर्शियल जहाज को बदलकर बनाया गया ड्रोन कैरियर माना जाता है। इसमें लगभग 180 मीटर लंबा रनवे था, जहां से शाहेद सीरीज के ड्रोन लॉन्च किए जा सकते थे।

IRIS Makran – यह विशाल जहाज समुद्र में एक तैरते हुए सैन्य बेस की तरह काम करता है और हेलीकॉप्टर व विशेष बलों के ऑपरेशन को समर्थन देता है।

अमेरिकी सेना का दावा है कि सैन्य कार्रवाई के दौरान इन जहाजों को भी निशाना बनाया गया।

ईरान की पनडुब्बियां भी बड़ी चुनौती

ईरान के पास लगभग 25 पनडुब्बियों का बेड़ा है। इनमें रूस मूल की किलो-क्लास पनडुब्बियां और स्वदेशी घादिर व नाहंग क्लास की छोटी पनडुब्बियां शामिल हैं। इन पनडुब्बियों को खास तौर पर फारस की खाड़ी के उथले पानी में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है। यही कारण है कि अमेरिकी नौसेना इन्हें एक गंभीर चुनौती मानती है।

अमेरिकी हमले और डूबे जहाज

  • अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक सैन्य कार्रवाई के दौरान 30 से ज्यादा ईरानी युद्धपोतों को नष्ट किया गया।
  • इनमें ड्रोन कैरियर शाहिद बाघेरी भी शामिल था, जिसे ऑपरेशन शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर ही डुबो दिया गया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक हिंद महासागर में श्रीलंका के पास भी एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो हमले में निशाना बनाया गया।

क्या दुनिया एक बड़े समुद्री युद्ध की ओर बढ़ रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। कई विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी सैन्य टकराव से दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

वैश्विक राजनीति में बढ़ेगी हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव सिर्फ सैन्य रणनीति का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी भू-राजनीतिक ताकतों का भी खेल माना जा रहा है। मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की चिंता आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

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