उत्तर प्रदेश के बांदा में जमीन हड़पने का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि भू-माफियाओं ने 20 साल पहले मर चुकी महिला को ‘जिंदा’ दिखाकर उसकी करोड़ों की जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम करा ली। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
बांदा में भू-माफियाओं का बड़ा खेल, फर्जी रजिस्ट्री से करोड़ों की जमीन गायब
बांदा जिले में सामने आए इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि भू-माफियाओं का नेटवर्क कितना संगठित और खतरनाक हो चुका है। आरोप है कि एक गिरोह लंबे समय से गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों की जमीनों पर नजर गड़ाए बैठा है। जैसे ही उन्हें मौका मिलता है, वे रजिस्ट्री कार्यालय में फर्जी तरीके से बैनामा कराकर जमीन हड़प लेते हैं। ताजा मामले में भी इसी तरह की साजिश रची गई, जिसमें मृत महिला की जमीन को धोखाधड़ी से किसी और के नाम कर दिया गया।
20 साल पहले मर चुकी महिला को बनाया ‘जिंदा’, रच दी बड़ी साजिश
पीड़ित महेशवरा के अनुसार, उसके पिता बल्दू की करीब 25 साल पहले मौत हो गई थी और इसके बाद उसकी मां फुलिया और उसके नाम पर जमीन दर्ज थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उसकी मां की भी 20 साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बावजूद गिरोह ने किसी दूसरी महिला को फुलिया बनाकर रजिस्ट्री कार्यालय में पेश किया और जमीन का बैनामा आजम खान के नाम करा दिया। यह घटना न सिर्फ धोखाधड़ी का मामला है बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही को भी उजागर करती है।
गिरोह का जाल: एक-एक किरदार की भूमिका से खुला राज
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कई लोग शामिल हैं। खेमचन्द्र पाल ने अपनी दादी को मृत महिला के रूप में पेश किया, जबकि अन्य लोगों ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरा कराने में सहयोग दिया। इस गिरोह में राजेश चक्रवर्ती, हरिकरन, रज्जू उर्फ नेम कुमार, केदार पाल, अनिल प्रजापति, भागवत प्रसाद, दिलीप कुमार सिंह समेत कई नाम शामिल हैं। यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम करता है और हर सदस्य की इसमें अलग भूमिका होती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले, 34 बीघा जमीन का भी हुआ था खेल
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इसी गांव हटेटीपुरवा में 34 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आ चुका है। 26 फरवरी को दर्ज उस मामले में भी आजम खान मुख्य आरोपी था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ हो गया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि एक बड़े गिरोह का संगठित अपराध है।
पुलिस एक्शन में: मुख्य आरोपी जेल में, बाकी की तलाश तेज
कोतवाली प्रभारी बलराम सिंह के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी आजम खान को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अब इस नए मामले में भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
गरीबों की जमीन पर माफिया की नजर, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रजिस्ट्री जैसी प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो जाती है। गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाकर उनकी जमीन हड़पने का यह तरीका बेहद खतरनाक है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह ऐसे गिरोहों पर लगाम लगाए और आम जनता का भरोसा बनाए रखे। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।