बरेली। आजाद सहकारी आवास समिति लिमिटेड में एक बड़ा भूखण्ड और पैसों का घोटाला सामने आया है। समिति के उच्च पदाधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर समिति की पार्क की जमीन समेत अन्य भूखण्डों को बेहद कम कीमत में गैर-सदस्यों को बेच दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहकारी अधिकारी दीपक कुमार राना ने इज्जतनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
कागजों में समिति को सिर्फ लाखों के बदले हजारों मिले
जांच में खुलासा हुआ कि समिति के तत्कालीन सचिव राजीव सक्सेना ने वर्ष 2024 में चार बैनामे कर ठगी की योजना अंजाम दी। इनमें से दो बैनामे समिति की पार्क की जमीन के थे, जिसे दो हिस्सों में बांटकर एक ही गैर-सदस्य महिला के नाम कर दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि यह जमीन पहले ही कानूनी रूप से शून्य घोषित की जा चुकी थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इन दो भूखण्डों का सर्कल रेट लगभग 84 लाख रुपये था, लेकिन कागजों में समिति को मात्र 51 हजार 500 रुपये मिले दिखाए गए। इसके अलावा दो अन्य भूखण्ड भी गैर-सदस्यों के नाम बिक्री के लिए भेजे गए, जिनका सर्कल रेट करीब 27 लाख रुपये था, लेकिन रकम सिर्फ कुछ हजार ही दिखाई गई। कुल मिला कर समिति को लगभग 1 करोड़ 11 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जबकि बैंक में जमा केवल 96 हजार 525 रुपये दिखाए गए। इससे साफ है कि समिति को एक करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक की चपत लगी है।
फर्जी बैठकें, गुमराह दस्तावेज और रिकॉर्ड का अभाव
जांच में यह भी सामने आया कि जो रकम बैनामों में दिखाई गई, वह समिति के बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई। सहकारी अधिकारी जब सचिव से दस्तावेज मांगने गए, तो कोई रिकॉर्ड नहीं पेश किया गया। समिति के अन्य पदाधिकारी भी जांच में शामिल हुए और उन्होंने लिखा कि न तो उन्हें बैठकों की सूचना दी गई और न ही किसी बैनामे पर उनके हस्ताक्षर थे। इससे फर्जी बैठकों और कागजी घोटाले का संदेह और मजबूत हुआ।
अधिकारियों की सख्त कार्रवाई, जांच जारी
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ के निर्देश पर यह मामला सुपरवाइजरी जांच में लिया गया है। सहकारी अधिकारी ने सुरक्षा के साथ एफआईआर दर्ज कर, समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितने भूखण्ड गैरकानूनी तरीके से बेचे गए और कितने करोड़ रुपये का नुकसान समिति को हुआ।