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लखनऊ। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश के सारनाथ और हस्तिनापुर के पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की। जो उत्तर प्रदेश के इन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा। साथ ही नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड, टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की घोषणाए भी की गई हैं। वहीं आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की घोषणा, उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन समृद्ध राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ पर्यटन आधारित रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।

सारनाथ और हस्तिनापुर की ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगी वैश्विक पहचान

वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत अनुभव-आधारित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थल सारनाथ और हस्तिनापुर शामिल हैं। इसमें से वाराणसी स्थित सारनाथ, बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल होने के साथ देश का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल भी है। सारनाथ में ही भगवान बुद्ध ने अपना पहला धर्मचक्र प्रवर्तन का उपदेश दिया था। यहां धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सिंह शीर्ष वाला अशोक स्तंभ भी स्थित है, जिससे भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लिया गया है। साथ ही यहां से मौर्य, गुप्त और पाल युगीन मूर्तियों और बौद्ध विहारों के अवशेष भी मिले हैं। इसी क्रम में मेरठ जिले में स्थित महाभारत कालीन हस्तिनापुर को भी शामिल किया गया है। हस्तिनापुर, जिसे कौरवों की राजधानी के रूप में जाना जाता है, 1950-52 में डॉ. बी.बी. लाल द्वारा की गई खुदाई में यहां से महाभारत और हड़प्पा कालीन पॉटरी और पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं। साथ ही यहां स्थित पांडव टीला और कर्ण मंदिर भी प्रमुख पुरातात्विक महत्व के साक्ष्य हैं। इन स्थलों को वैश्विक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकास करने से एक ओर पूर्वी यूपी में वाराणसी और दूसरी ओर मथुरा-मेरठ क्षेत्र के साथ पश्चिमी यूपी के पर्यटन को बूस्ट मिलेगा।

पुरातात्विक स्थलों का अनुभव-आधारित पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकास

केंद्रीय बजट में सारनाथ और हस्तिनापुर समेत देश के अन्य 13 पुरातात्विक स्थलों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्यूरेटेड वॉकवे, डिजिटल गाइड, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग तकनीकें, बेहतर साइनबोर्ड और पहुंच सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पुरातात्विक स्थलों में उत्खनित परिदृश्यों को विशेष वॉकवे के माध्यम से जनता के लिए खोला जाएगा। इन प्रयासों से इन पुरास्थलों के पर्यटन को साइटसीइंग से आगे बढ़ाकर ‘अनुभव-आधारित’ पर्यटन के रूप में विकसित करना है। ताकि देशी-विदेशी से आने वाले पर्यटक इन स्थलों पर सिर्फ देखने नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को गहराई से महसूस कर सकें।

केंद्रीय बजट की घोषणाओं से खुलेंगे टूरिज्म में रोजगार के नए अवसर

केंद्रीय बजट की एक अन्य प्रमुख घोषणा आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की भी है। जिसके तहत देश के 20 आइकॉनिक पर्यटन स्थलों पर पायलट प्रोग्राम चलाकर टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें टूरिस्ट गाइड़ों के प्रोफेशनल स्किल्स, भाषा और डेस्टिनेशन नॉलेज पर फोकस होगा। यह प्रशिक्षण प्रोग्राम उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन-समृद्ध राज्य में इससे हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा बजट में नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के स्थलों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन कर पर्यटन को बढ़ावा देगी। साथ ही टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी को अपग्रेड करने की भी घोषणा भी बजट में की गई है। जो टूरिस्ट गाइड्स, हॉस्पिटैलिटी स्टॉफ, ट्रैवल मैनेजमेंट से जुड़े युवाओं का स्किल डेवलपमेंट न केवल पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देगा साथ ही प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा। बजट की ये घोषणाएं उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई गति देने के साथ, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देंगी।

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