उत्तर प्रदेश के व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शुमार बरेली जंक्शन पर रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। सुबह से लेकर देर रात तक प्लेटफार्मों पर ट्रेनों की आवाज, यात्रियों की भीड़ और सामान से लदे यात्रियों की भागदौड़—यहां की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी है। लेकिन भीड़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती हमेशा रही है प्लेटफार्म से बाहर निकलना।
तीन मीटर चौड़े पुल पर रोज की जद्दोजहद
मौजूदा समय में जंक्शन के दोनों छोर—शाहजहांपुर और रामपुर—पर तीन-तीन मीटर चौड़ाई के फुटओवर ब्रिज बने हुए हैं। यही दो पुल रोजाना 40 से 42 हजार यात्रियों का भार संभालते हैं। जब इंटरसिटी एक्सप्रेस, आला हजरत एक्सप्रेस और अन्य प्रमुख ट्रेनें लगभग एक ही समय पर प्लेटफार्म पर पहुंचती हैं, तो हजारों यात्री एक साथ पुल की ओर बढ़ते हैं। ऐसे में पुल पर कदम रखने भर की जगह नहीं बचती। कई बार यात्रियों को धक्का-मुक्की के बीच धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ता है। छोटे बच्चों को गोद में लिए माता-पिता और बुजुर्गों को सहारा देकर ले जाते परिजन अक्सर इस भीड़ में घबराहट महसूस करते हैं।
हादसे की आशंका और लंबा इंतजार
भीड़ के दबाव के कारण कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, जब यात्रियों को पुल खाली होने तक नीचे प्लेटफार्म पर इंतजार करना पड़ता है। भीड़ अधिक होने पर गिरने या भगदड़ जैसी आशंका भी बनी रहती है। त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि पीक आवर में पुल पार करना किसी परीक्षा से कम नहीं होता। कुछ मिनटों का रास्ता तय करने में लंबा समय लग जाता है। कई बार ट्रेन पकड़ने या ऑटो-रिक्शा तक पहुंचने में देरी भी हो जाती है।
छह मीटर चौड़ा नया पुल देगा राहत
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए रेलवे ने छह मीटर चौड़ा नया फुटओवर ब्रिज बनाने का फैसला लिया है। नया पुल शाहजहांपुर छोर पर बनाया जाएगा। इसके तैयार होने के बाद जंक्शन पर कुल तीन फुटओवर ब्रिज हो जाएंगे, जिससे भीड़ का दबाव स्वाभाविक रूप से बंट जाएगा। चौड़ाई दोगुनी होने से यात्रियों का आवागमन ज्यादा सहज होगा। लोगों को एक-दूसरे से सटकर चलने की मजबूरी कम होगी और बाहर निकलने में लगने वाला समय भी घटेगा। मुख्य वाणिज्य निरीक्षक मो. इमरान ने बताया कि प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। जंक्शन पर पहले से मौजूद दोनों पुलों के साथ नया पुल भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और तेज़ निकासी उपलब्ध कराना है।
एस्केलेटर और लिफ्ट की सुविधा
जंक्शन पर बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए दोनों छोर पर एस्केलेटर और लिफ्ट भी लगाई गई हैं। इससे भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को भी मदद मिलती है। हालांकि, इन सुविधाओं के सुचारु संचालन की चुनौती बनी रहती है।
कैंट छोर पर एस्केलेटर बंद, बढ़ी परेशानी
यात्रियों की राहत के बीच एक चिंता भी है। कैंट छोर पर लगा एस्केलेटर पिछले चार दिन से खराब पड़ा है। इससे पुल पर चढ़ने-उतरने में यात्रियों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। भीड़ के समय एस्केलेटर बंद होना समस्या को और बढ़ा देता है। बुधवार को एक एस्केलेटर के खराब होने के बाद उसकी मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है। यात्रियों का कहना है कि अगर सुविधाएं समय पर दुरुस्त न हों, तो नए पुल का फायदा भी आधा रह जाएगा।
स्टेशन के बढ़ते महत्व के बीच जरूरी कदम
बरेली जंक्शन उत्तर रेलवे का एक अहम जंक्शन है, जहां से कई प्रमुख मार्गों की ट्रेनें गुजरती हैं। दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज, देहरादून, वाराणसी और अन्य शहरों के लिए रोजाना ट्रेनें यहां से संचालित होती हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आधारभूत ढांचे का विस्तार समय की मांग बन चुका है। नया फुटओवर ब्रिज इसी दिशा में उठाया गया कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा हुआ और साथ ही मौजूदा सुविधाओं की नियमित देखरेख की गई, तो जंक्शन की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
यात्रियों की नजर समयसीमा पर
अब यात्रियों की निगाह इस बात पर टिकी है कि नया फुटओवर ब्रिज कब तक बनकर तैयार होगा। साथ ही बंद पड़े एस्केलेटर को कब तक दुरुस्त किया जाएगा। क्योंकि जब तक निर्माण पूरा नहीं होता, भीड़ की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। बहरहाल, रेलवे के इस फैसले से एक संदेश जरूर गया है कि बढ़ती भीड़ और यात्रियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले समय में यदि निर्माण कार्य तय समय पर पूरा होता है, तो बरेली जंक्शन की तस्वीर बदल सकती है।