पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर देश में सियासी तापमान भी चढ़ गया है। सरकार ने 10 रुपये की उत्पाद शुल्क कटौती कर राहत देने का दावा किया, लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘राहत नहीं, सिर्फ दिखावा’ करार देते हुए बड़ा हमला बोला है।
वैश्विक संकट की आंच, देश में सियासी संग्राम
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के बाद भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी। इसी बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती का ऐलान किया। लेकिन इस फैसले ने राहत से ज्यादा सियासी बहस को जन्म दे दिया है, जहां सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
कांग्रेस का सीधा हमला: ‘यह राहत नहीं, सिर्फ दिखावा’
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह कदम जनता को राहत देने के बजाय सिर्फ दिखावे के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को लग रहा है कि पेट्रोल-डीजल सस्ता हो गया है, तो यह भ्रम है। असल में कीमतों में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ा है। कांग्रेस ने इस फैसले को ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है।
डीलर और उपभोक्ता एक ही कीमत पर, कहां है राहत?
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें डीलरों और उपभोक्ताओं के लिए लगभग समान बनी हुई हैं। इसका मतलब यह है कि जो कटौती की गई है, उसका सीधा फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा। कांग्रेस का दावा है कि अगर कीमतों में वास्तविक गिरावट होती, तो उपभोक्ताओं को सीधा लाभ दिखता, लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा नहीं है।
कटौती का सच: तेल कंपनियों को मिली राहत?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने जो कटौती की है, वह ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ में की गई है, जो तेल कंपनियां सरकार को देती हैं। यानी यह राहत सीधे उपभोक्ताओं के बजाय कंपनियों के बोझ को कम करने के लिए दी गई है। कांग्रेस का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद तेल कंपनियां घाटे में चल रही थीं, इसलिए सरकार ने उनके लिए राहत का रास्ता निकाला, न कि जनता के लिए।
सरकार का पक्ष: पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में लगभग 60 दिनों का तेल भंडार मौजूद है और एलपीजी की आपूर्ति भी स्थिर है। सरकार ने कमी की खबरों को ‘गलत सूचना अभियान’ बताया और कहा कि इसका उद्देश्य लोगों में घबराहट फैलाना है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है।