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नई दिल्ली। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने करवट ले ली है और अब गर्मी का असली ‘अटैक मोड’ शुरू होने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा भविष्यवाणी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार मई-जून में गर्मी सिर्फ दिन में नहीं, बल्कि रातों में भी कहर बरपाएगी। लू के थपेड़े, उमस भरी रातें और अनिश्चित बारिश—तीनों मिलकर लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं।

तपते आसमान का अलर्ट: अप्रैल से जून तक बढ़ेगी गर्मी की मार

नई दिल्ली से जारी IMD के ताजा अपडेट ने साफ कर दिया है कि अप्रैल से जून के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर सामान्य से ज्यादा रहने वाला है। हालांकि कुछ इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य या थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन राहत की उम्मीद यहां भी अधूरी है। असली झटका रात के तापमान में मिलेगा, जो सामान्य से ज्यादा रहने वाला है। यानी दिन की गर्मी के बाद रात भी चैन नहीं लेने देगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस बार इसका असर ज्यादा व्यापक होगा।

16 राज्यों में लू का कहर: यूपी-बिहार समेत बड़े हिस्से होंगे प्रभावित

IMD प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, इस बार देश के करीब 16 राज्यों में लू के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा होगी। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश भी इस सूची में हैं। इन इलाकों में लू के दिन सामान्य से 2 से 8 दिन ज्यादा हो सकते हैं। दिल्ली-NCR भी इस बार भीषण गर्मी और लू से अछूता नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए खास तौर पर खतरनाक साबित हो सकती है।

रातें बनेंगी नई परेशानी: गर्म हवाओं से नहीं मिलेगी राहत

इस बार मौसम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि रातें भी राहत नहीं देंगी। IMD के अनुसार, देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। इसका मतलब है कि दिन भर की तपिश के बाद भी शरीर को आराम नहीं मिलेगा, जिससे हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। हालांकि महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में थोड़ी राहत की संभावना जताई गई है, जहां रात का तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है। लेकिन कुल मिलाकर देश के बड़े हिस्से को ‘हॉट नाइट्स’ का सामना करना पड़ेगा।

बारिश का ट्विस्ट: अप्रैल में राहत, लेकिन पूरी कहानी अलग

जहां गर्मी डराने वाली है, वहीं बारिश को लेकर भी मौसम विभाग ने दिलचस्प संकेत दिए हैं। अप्रैल महीने में उत्तर-पश्चिमी भारत सहित कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए तापमान में गिरावट जरूर आएगी, लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बारिश गर्मी के ट्रेंड को पूरी तरह बदलने में सक्षम नहीं होगी, बल्कि केवल अस्थायी राहत देगी। यानि कुल मिलाकर गर्मी का दबदबा बना रहेगा, भले ही बीच-बीच में बारिश दस्तक दे।

अल नीनो का खतरा: मॉनसून पर पड़ सकता है असर

IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून के दौरान ENSO यानी अल नीनो-साउदर्न ऑस्किलेशन की स्थिति फिलहाल तटस्थ रहेगी। लेकिन इसके बाद अल नीनो के विकसित होने की संभावना बढ़ रही है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर मॉनसून के आखिरी चरण यानी अगस्त-सितंबर में देखने को मिल सकता है। आमतौर पर अल नीनो की स्थिति बारिश को कमजोर करती है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ता है। हालांकि फिलहाल IMD ने मॉनसून को लेकर अंतिम भविष्यवाणी करने से परहेज किया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि मौसम का मिजाज आगे और ज्यादा अनिश्चित हो सकता है।

मार्च का खतरनाक ट्रेंड: 45 मौतों ने बढ़ाई चिंता

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में खराब मौसम ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। देशभर में आंधी, बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की घटनाओं में 45 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा 32 मौतें बिजली गिरने से हुईं, जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, छत्तीसगढ़ और केरल शामिल हैं।

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